September 9, 2026

उत्तराखंड दून के मेधावियों ने छुए सफलता के नए आयाम, बोर्ड परीक्षा परिणामों के बाद अब करियर की तैयारी तेज,,,,

उत्तराखंड दून के मेधावियों ने छुए सफलता के नए आयाम, बोर्ड परीक्षा परिणामों के बाद अब करियर की तैयारी तेज,,,,

देहरादून। आइसीएसई (ICSE) और आइएससी (ISC) के परीक्षा परिणाम घोषित होने के साथ ही देहरादून के मेधावी छात्र-छात्राओं के चेहरों पर खुशी की लहर है। शानदार अंकों के साथ सफलता का परचम लहराने के बाद, अब इन छात्रों ने अपने भविष्य की दिशा तय कर ली है। कोई इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नाम कमाना चाहता है, तो कोई चिकित्सा सेवा (NEET) के जरिए देश की सेवा करने का इच्छुक है।

प्रमुख मेधावियों की उपलब्धियां और लक्ष्य

​शहर के विभिन्न स्कूलों के छात्रों ने अपनी कड़ी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है। कुछ प्रमुख सफल छात्र और उनके भविष्य के लक्ष्यों का विवरण नीचे दिया गया है:

छात्र/छात्रा का नाम

विद्यालय

प्राप्तांक (%)

करियर का लक्ष्य

विशेष उपलब्धि

अनुष्का कोटनाला

सेंट जोजेफ्स एकेडमी

99.5%

डॉक्टर (NEET)

स्कूल टॉपर

सिया महेश्वरी

सेंट जोजेफ्स एकेडमी

99.25%

इंजीनियरिंग

कनुप्रिया सेठी

सेंट जोजेफ्स एकेडमी

98.75%

इंजीनियरिंग

स्वास्तिका रती शर्मा

राजा राम मोहन राय एकेडमी

98.75%

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग

JEE में 93 पर्सेंटाइल

एकाग्र कक्कड़

ब्राइटलैंड्स स्कूल

98.4%

मर्चेंट नेवी/इंजीनियरिंग

अर्जुन सिंघल

ब्राइटलैंड्स स्कूल

98.25%

कंप्यूटर साइंस

सिंगापुर से पढ़ाई का लक्ष्य

ए. परमेक्षु नवानी

97.75%

मैकेनिकल इंजीनियरिंग

JEE में 91 पर्सेंटाइल

ओजस मदान

ब्राइटलैंड्स स्कूल

97.27

वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर तैयारी

​जहाँ एक ओर अनुष्का कोटनाला जैसे छात्र चिकित्सा के क्षेत्र में जाने के लिए नीट (NEET) की तैयारी में जुटे हैं, वहीं अर्जुन सिंघल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिंगापुर से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करने का लक्ष्य रखा है। एकाग्र कक्कड़ ने जेईई के साथ-साथ मर्चेंट नेवी को भी अपने करियर विकल्प के रूप में चुना है।

प्रतियोगी परीक्षाओं में भी जमाई धाक

​केवल बोर्ड परीक्षा ही नहीं, इन मेधावियों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में भी अपनी प्रतिभा साबित की है। स्वास्तिका रती शर्मा ने जेईई मेन में 93 पर्सेंटाइल और ए. परमेक्षु नवानी ने 91 पर्सेंटाइल हासिल कर इंजीनियरिंग की राह आसान कर ली है।

सफलता का मंत्र: अनुशासन और मार्गदर्शन

​सभी मेधावियों ने अपनी इस शानदार उपलब्धि का श्रेय अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन और अभिभावकों के अटूट सहयोग को दिया है। छात्रों का मानना है कि:

​”निरंतर अभ्यास, अनुशासन और सकारात्मक सोच ही वह चाबी है, जो सफलता के बंद दरवाजे खोल सकती है।”

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