May 21, 2026

“धर्म – कर्म” शनि जन्मोत्सव पर आज जानिए सूर्यपुत्र के जन्म की पौराणिक कथा और शनि देव को प्रसन्न करने और दोष निवारण के अचूक उपाय,,,,

“धर्म – कर्म” शनि जन्मोत्सव पर आज जानिए सूर्यपुत्र के जन्म की पौराणिक कथा और शनि देव को प्रसन्न करने और दोष निवारण के अचूक उपाय,,,,

देहरादून:  हिंदू धर्मग्रंथों में सूर्यपुत्र भगवान शनिदेव को न्याय का देवता और कर्मफल दाता माना गया है। वे व्यक्ति को उसके अच्छे-बुरे कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। साल 2026 में शनि जन्मोत्सव (शनि जयंती) 16 मई, यानी आज ही के दिन मनाई जा रही है।

​आइए जानते हैं शनि जन्मोत्सव की पौराणिक कथा और शनिदेव को प्रसन्न करने के अचूक उपाय:

🏵 शनि जन्मोत्सव की पौराणिक कथा

​स्कंद पुराण के काशी खंड के अनुसार, भगवान शनिदेव का जन्म सूर्य देव और उनकी पत्नी छाया के गर्भ से हुआ था। कथा इस प्रकार है:

​सूर्य देव का विवाह राजा दक्ष की कन्या ‘संज्ञा’ से हुआ था। सूर्य देव का तेज इतना अधिक था कि संज्ञा उसे सहन करने में असमर्थ रहती थीं। कुछ समय बाद संज्ञा ने सूर्य देव के तेज से बचने के लिए एक उपाय सोचा। उन्होंने अपनी तपस्या के बल पर अपने जैसी ही एक हुबहू प्रतिमूर्ति (परछाई) तैयार की, जिसका नाम ‘छाया’ रखा।

​संज्ञा ने छाया को आदेश दिया कि वह उनकी अनुपस्थिति में सूर्य देव की सेवा करे और पत्नी धर्म का पालन करे, लेकिन यह राज किसी को पता नहीं चलना चाहिए। इसके बाद संज्ञा अपने पिता के घर चली गईं।

​सूर्य देव को इस बात का आभास नहीं हुआ कि वे संज्ञा नहीं बल्कि छाया के साथ रह रहे हैं। कुछ समय बाद छाया गर्भवती हुईं। गर्भावस्था के दौरान छाया भगवान शिव की इतनी कठोर भक्ति और तपस्या में लीन थीं कि उन्होंने धूप, भूख और प्यास की भी चिंता नहीं की। कड़ी धूप में निरंतर तप करने के कारण उनके गर्भ में पल रहे शिशु (शनिदेव) का रंग गर्भ में ही झुलसकर पूरी तरह काला हो गया।

🏵 शनिदेव की जन्म कथा

ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को जब शनिदेव का जन्म हुआ, तो उनके काले रंग को देखकर सूर्य देव क्रोधित हो गए। सूर्य देव ने संज्ञा (छाया) पर संदेह किया और कहा कि यह मेरा पुत्र नहीं हो सकता।

​पिता सूर्य देव द्वारा अपनी माता के इस अपमान को देखकर शिशु शनिदेव को भी अत्यंत क्रोध आया और उन्होंने क्रूर दृष्टि से अपने पिता की ओर देखा। शनिदेव की इस शक्तिशाली और क्रूर दृष्टि के कारण सूर्य देव का शरीर भी काला पड़ गया और उनके घोड़ों की चाल रुक गई। सूर्य देव ने जब संकट में आकर भगवान शिव की आराधना की, तब शिव जी ने उन्हें पूरी सच्चाई बताई कि छाया के कठोर तप के कारण ही पुत्र का रंग ऐसा हुआ है। इसके बाद सूर्य देव ने अपनी भूल स्वीकारी और शनिदेव से क्षमा मांगी, जिसके बाद उन्हें अपना वास्तविक रूप पुनः प्राप्त हुआ। तभी से शनिदेव को माता के तप के कारण परम शक्तिशाली और नवग्रहों में न्यायाधीश का पद प्राप्त हुआ।

🏵 भगवान शनिदेव को प्रसन्न करने के अचूक उपाय

​यदि आपकी राशि पर शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा चल रही है, या आप जीवन में आ रही बाधाओं को दूर करना चाहते हैं, तो निम्नलिखित उपाय अत्यंत प्रभावी माने जाते हैं:

​1. तेल और तिल का दान (छाया दान)

  • ​शनि जयंती या किसी भी शनिवार के दिन एक कांसे या लोहे की कटोरी में सरसों का तेल भरें।
  • ​उसमें अपना चेहरा (परछाई) देखें और फिर उस तेल को किसी जरूरतमंद को या शनि मंदिर में दान कर दें। इसे ‘छाया दान’ कहते हैं। इसके अलावा काले तिल और काले चने का दान भी शुभ होता है।

​2. पीपल के वृक्ष की पूजा

  • ​शनिवार की शाम को पीपल के पेड़ के पास जाएं। वहां सरसों के तेल का एक दीपक (दीया) जलाएं और पीपल की सात बार परिक्रमा करें।
  • ​पीपल के वृक्ष में भगवान विष्णु और शनिदेव दोनों का वास माना जाता है, इसलिए इस उपाय से शनि दोष शांत होता है।

​3. हनुमान जी की आराधना

  • ​शनिदेव ने हनुमान जी को वचन दिया था कि जो भी हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि कभी प्रताड़ित नहीं करेंगे।
  • ​इसलिए शनिवार के दिन हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ करने से शनिदेव के अशुभ प्रभाव तुरंत दूर होते हैं।

​4. कर्मों में शुचिता और जरूरतमंदों की मदद

  • ​शनिदेव कर्मों के देवता हैं। वे समाज के निचले तबके, मजदूरों, वृद्धों और असहाय लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • ​जो व्यक्ति अपनी मेहनत से जीविका चलाने वाले मजदूरों का सम्मान करता है, उन्हें भोजन या धन से मदद करता है, शनिदेव उससे सदैव प्रसन्न रहते हैं। कभी भी किसी लाचार व्यक्ति का हक न मारें।

​5. शनि मंत्रों का जाप

​शनिवार की शाम को रुद्राक्ष की माला से नीचे दिए गए तांत्रिक शनि मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें

“ॐ शं शनैश्चराय नमः”

धन प्राप्ति के लिए शनि मंत्र का जाप करना एक प्रभावी उपाय माना जाता है। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप विशेष रूप से फलदायी है। इसके अतिरिक्त, “ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नमः” (शनि बीज मंत्र) और “ॐ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्‌। छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्‌” मंत्रों का भी जाप किया जा सकता है।

​6. पशु-पक्षियों की सेवा

  • ​शनिवार के दिन काले कुत्ते को सरसों के तेल से चुपड़ी हुई रोटी खिलाएं।
  • ​इसके अलावा कौओं को दाना डालना और चींटियों को आटा-शक्कर खिलाने से भी राहु-केतु और शनि जनित दोषों से राहत मिलती है।
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