उत्तराखंड ऋषिकेश में गूंजी वैश्विक धुनें, इंटरनेशनल मृदंग फाउंडेशन के समारोह में भारतीय-अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की जुगलबंदी, शास्त्रीय फ्यूज़न ने जीता दिल,,,,,
ऋषिकेश। योग और आध्यात्म की नगरी ऋषिकेश में इंटरनेशनल मृदंग फाउंडेशन द्वारा एक विशेष संगीत समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में देश-विदेश के जाने-माने कलाकारों ने मंच साझा करते हुए एक अद्भुत शास्त्रीय फ्यूज़न (Classical Fusion) प्रस्तुति दी, जिसने वहाँ मौजूद संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अनोखे संगीत संगम में भारतीय शास्त्रीय संगीत की सदियों पुरानी गहराई और वैश्विक ध्वनियों का एक अत्यंत दुर्लभ व उत्कृष्ट समन्वय देखने को मिला।
तबले की थाप और संतूर की झंकार से आध्यात्मिक हुआ माहौल

कार्यक्रम की शुरुआत से ही कलाकारों ने समां बांध दिया। देश के सुप्रसिद्ध तबला उस्ताद (Maestro) निलिमेश चक्रवर्ती ने अपनी जटिल लयकारी और सधे हुए हाथों से पूरी प्रस्तुति को एक बेहद मजबूत आधार प्रदान किया। वहीं दूसरी ओर, प्रख्यात संतूर वादक सुद्धाशील चटर्जी के संतूर से निकली मधुर और दिव्य धुनों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक और शांतिमय रस से सराबोर कर दिया। तबले और संतूर की यह जुगलबंदी श्रोताओं के लिए एक अनूठा अनुभव रही।
मृदंगम, डिग्गिराडू और गिटार के संगम से बना ‘विश्व संगीत’
इस समारोह की सबसे बड़ी विशेषता विभिन्न संस्कृतियों के वाद्यों का एक मंच पर आना रहा। मृदंगम वादक सत्या ने दक्षिण भारतीय शास्त्रीय परंपरा की समृद्ध और शक्तिशाली लय को इस फ्यूज़न में शामिल कर कार्यक्रम को एक नया आयाम दिया। वहीं, पारंपरिक ऑस्ट्रेलियाई वाद्य यंत्र ‘डिग्गिराडू’ (Didgeridoo) पर वादक दुष्यंत की गहरी, गूंजती और कंपनयुक्त ध्वनि ने इस प्रस्तुति को वैश्विक स्तर तक पहुँचाया। इसके साथ ही रूस से आए गिटार वादक के वेस्टर्न कॉर्ड्स और धुनों ने इस जुगलबंदी में विश्व संगीत का ऐसा रंग घोला कि दर्शक झूमने पर मजबूर हो गए।
सांस्कृतिक आदान-प्रदान का अनूठा मंच
इंटरनेशनल मृदंग फाउंडेशन का यह आयोजन न केवल संगीत का प्रदर्शन था, बल्कि यह पूर्व और पश्चिम की संस्कृतियों के बीच संवाद का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा। कार्यक्रम के अंत में संगीत प्रेमियों और आलोचकों ने इस शास्त्रीय फ्यूज़न की सराहना करते हुए इसे आधुनिक दौर में पारंपरिक संगीत को वैश्विक पटल पर ले जाने का एक सराहनीय प्रयास बताया।


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