October 13, 2026

उत्तराखंड भानियावाला-ऋषिकेश फोरलेन परियोजना, 743 करोड़ की लागत से सुधरेगा सफर, पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा का रखा गया खास ख्याल,,,

उत्तराखंड भानियावाला-ऋषिकेश फोरलेन परियोजना, 743 करोड़ की लागत से सुधरेगा सफर, पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा का रखा गया खास ख्याल,,,

​देहरादून। उत्तराखंड में कनेक्टिविटी को मजबूत करने और पर्यटन को रफ्तार देने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा भानियावाला-ऋषिकेश परियोजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। करीब 20 किलोमीटर लंबी इस फोरलेन सड़क का निर्माण 743 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से किया जा रहा है। इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण का विशेष तालमेल बिठाया गया है।

​🟢 वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए बनेंगे ‘एलीफेंट अंडरपास’

​परियोजना क्षेत्र में वन और वन्यजीवों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। एनएचएआई के अनुसार, इस प्रस्तावित मार्ग पर हाथियों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए 3.5 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड संरचना सहित विशेष एलीफेंट अंडरपास विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा, वन्यजीवों को मानवीय गतिविधियों से परेशान होने से बचाने के लिए मार्ग पर निम्नलिखित उपाय किए जाएंगे:

  • ​साउंड बैरियर और एंटी-ग्लेयर स्क्रीन: वाहनों के शोर और तेज रोशनी को रोकने के पुख्ता इंतजाम।
  • ​नो हॉर्न जोन: वन्यजीव क्षेत्रों के पास हॉर्न बजाने पर पूर्ण प्रतिबंध।
  • ​चेतावनी संकेतक और गति नियंत्रण: वन्यजीवों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में स्पीड लिमिट तय करने के साथ ही विशेष चेतावनी बोर्ड लगाए जाएंगे।

​🟢 पर्यावरण संरक्षण: काटे नहीं, ‘प्रत्यारोपित’ किए जाएंगे 754 पेड़

​विकास की इस दौड़ में पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुँचे, इसके लिए योजना में विशेष प्रबंध किए गए हैं। परियोजना के तहत पेड़ों की कटाई को न्यूनतम करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 754 पेड़ों को काटने के बजाय वैज्ञानिक तकनीक से दूसरी जगहों पर सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित (Transplant) किया जाएगा।

​🟢 सुगम और सुरक्षित होगा सफर, जाम से मिलेगी मुक्ति

​इस फोरलेन मार्ग के निर्माण से ऋषिकेश आने-जाने वाले स्थानीय लोगों और पर्यटकों को भारी जाम और वाहनों के दबाव से बड़ी राहत मिलेगी।

​🟢 एनएचएआई का कथन

“फोर लेन निर्माण से सड़क की ज्यामिति (अलाइनमेंट) में बड़ा सुधार होगा, जिससे यात्रा पहले से कहीं अधिक सुरक्षित हो जाएगी। इस मार्ग पर स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों दोनों को ही आधुनिक सड़क सुरक्षा सुविधाओं का लाभ मिलेगा।”

 

​इस परियोजना के पूरा होने से न केवल ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में यातायात सुगम होगा, बल्कि यह सतत विकास (Sustainable Development) का एक बेहतरीन उदाहरण भी पेश करेगी।

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