उत्तराखंड “मोक्षदायिनी गंगा और आदि कैलाश के धाम तक, आस्था और साधना के पथ पर बढ़ेगी छड़ी यात्रा”- पुष्कर सिंह धामी

हरिद्वार। वर्ष 2027 में होने वाले कुंभ मेले की तैयारियों के तहत गंगा तट पर स्थित घाटों के जीर्णोद्धार की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है। इस योजना में पौड़ी घाटी के स्वर्गआश्रम में गंगा किनारे के घाटों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सिंचाई विभाग ने इस परियोजना के लिए 6 करोड़ 50 लाख 23 हजार रुपये का प्रस्ताव दिया है। उच्च स्तरीय कमेटी की बैठक के बाद शासन ने प्रस्ताव को स्वीकृति दी है।
कार्ययोजना के तहत किए जाने वाले कार्य व तय समय
सिंचाई विभाग ने इस प्रस्ताव कार्ययोजना को प्रस्तावित किया है। इसके तहत पौड़ी गढ़वाल के समकेश्वर क्लीवेज बंड से लेकर आने वाले घाटों पर काम होगा। इसमें गंगा नदी के बाएं तट पर स्नान क्षेत्र में अत्यधिक दबाव रहता है, इन क्षेत्रों में सामान्य स्नान पर्व और भीड़ जुटने पर भारी संख्या में लोग जुटते हैं। इस दौरान सुरक्षा उपायों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सिंचाई विभाग ने रैंप निर्माण और अन्य सुरक्षात्मक उपाय किए जाएंगे। सिंचाई विभाग ने कार्यभार पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं।
सात अक्टूबर से शुरू होगी पवित्र छड़ी यात्रा और महा अनुष्ठान

हरिद्वार से श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा की ओर से उत्तराखंड के चार धामों सहित समरस पौराणिक और गुणनाम तीर्थों के दर्शन व पूजन के लिए निकाली जाने वाली पवित्र छड़ी यात्रा इस वर्ष 7 अक्टूबर से शुरू होगी। यह दिव्य यात्रा 30 अक्टूबर 2026 तक चलेगी। कुंभ से पहले इस यात्रा में महा अनुष्ठान के आयोजन की अलख भी जगाई जाएगी। जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरिहरि महाराज के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से देहरादून में भेंट किया। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज, श्रीमहंत आत्माराम, पीठाधीश्वर जूना अखाड़ा, महामंडलेश्वर वीरेंद्रानंद गिरि महाराज, जूना अखाड़े के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रीमहंत महेश्वर पुरी महाराज, श्रीमहंत नीलकंठ गिरि महाराज और अखाड़े के मीडिया प्रभारी नैपाल सिंह रावत शामिल रहे। संतों ने मुख्यमंत्री से पवित्र छड़ी यात्रा को नियमित सुगम मुहूर्त में हरिद्वार में औपचारिक दीक्षा देवी मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ शुरू करने का अनुरोध किया, जिस पर मुख्यमंत्री ने अपनी सहमति प्रदान करते हुए यात्रा की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।
गुमनाम तीर्थों को मिलेगा वैश्विक मंच
यात्रा के संबंध में जानकारी देते हुए प्रो. महावीर सिंह ने कहा कि इस पवित्र छड़ी यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल प्रसिद्ध चार धामों तक सीमित नहीं रहेगी। यात्रा के उन क्षेत्रों को प्रमुखता, उपेक्षित धार्मिक स्थलों स्थानों तक भी पहुंचेंगे, जिनके बारे में आम श्रद्धालु और तीर्थयात्री आज तक अनजान हैं। यात्रा के माध्यम से हम उन तीर्थों को पौराणिक, धार्मिक और अध्यात्मिक महत्व से जन-जन को परिचित कराएंगे। जब इन तीर्थों का विकास होगा तो न केवल तीर्थाटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं और निवासियों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि छड़ी यात्रा संपन्न होने के बाद हरिद्वार में आयोजित हो रहे कुंभ को निमंत्रण रूप में कर दो जाएगी। उन्होंने कहा कि यह यात्रा दो चरणों में संचालित होगी। इसमें केदारनाथ रूद्रप्रयाग मंडल और मानवरवाहिद कुमाऊं मंडल के समस्त तीर्थों का भ्रमण करते हुए यात्रा पवित्र ओम पर्वत और आदि कैलाश के दर्शनों तक जाएगी।
टनकपुर-बागेश्वर-कर्णप्रयाग हाईवे को मिले मां नंदा देवी राजमार्ग नाम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात के दौरान संतों के प्रतिनिधिमंडल ने केवल छड़ी यात्रा को लेकर महाराज को अवगत कराते हुए ज्ञापन भी सौंपा। ज्ञापन में उन्होंने टनकपुर से बागेश्वर होते हुए कर्णप्रयाग तक जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग का नामकरण मां नंदा देवी राजमार्ग करने की मांग की। संतों ने कहा कि विश्व प्रसिद्ध नंदा देवी राजजात यात्रा जो प्रत्येक 12 वर्ष में आयोजित होते हैं, का मुख्य पड़ाव और मार्ग यह है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था की प्रतीक मां नंदा के नाम पर इस राजमार्ग का होना सनातन परंपरा का सम्मान होगा। मुख्यमंत्री इस विषय पर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन संत प्रतिनिधिमंडल को दिया।

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