August 28, 2026

कैलास मानसरोवर यात्रा में नेपाल के रसुवा में बाढ़ से फंसे तीर्थयात्री, आइए जानते हैं यात्रा खर्च, समय और चयन प्रक्रिया की पूरी जानकारी,,,

कैलास मानसरोवर यात्रा में नेपाल के रसुवा में बाढ़ से फंसे तीर्थयात्री, आइए जानते हैं यात्रा खर्च, समय और चयन प्रक्रिया की पूरी जानकारी,,,

नई दिल्ली: नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ के कारण उन पर्यटकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं, जो रसुवागढ़ी बॉर्डर क्रॉसिंग के पास तिब्बत जाने या वहां से लौटने का इंतजार कर रहे थे। इस आपदा से प्रभावित होने वालों में कैलास मानसरोवर जाने वाले तीर्थयात्री बड़ी संख्या में शामिल हैं। पिछले कुछ समय से यह रूट तीर्थयात्रियों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है, विशेषकर अनिवासी भारतीयों और विदेशियों द्वारा इसे अधिक पसंद किया जा रहा है, क्योंकि विदेश मंत्रालय द्वारा संचालित पारंपरिक यात्रा मुख्य रूप से भारतीय नागरिकों के लिए है और इसके लिए लंबी प्रतीक्षा व जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

​स्थानीय आंकड़ों के अनुसार, इस साल अब तक रिकॉर्ड 13,523 तीर्थयात्रियों ने कैलास मानसरोवर यात्रा के लिए रसुवा रूट का उपयोग किया है। यात्रियों ने महंगे हुमला रूट के मुकाबले इस मार्ग को प्राथमिकता दी है, क्योंकि नेपाल के रास्ते निजी ऑपरेटरों की मदद से यात्रा करने वाले श्रद्धालु आमतौर पर इन्हीं दो मार्गों का चयन करते हैं।

​भारतीय विदेश मंत्रालय आधिकारिक तौर पर दो मार्गों से इस यात्रा का संचालन करता है। उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से जाने वाले मार्ग में लगभग 21 से 22 दिन का समय लगता है, जबकि सिक्किम के नाथू ला दर्रे से यात्रा पूरी होने में 20 दिन से अधिक का समय लगता है। मंत्रालय हर साल कंप्यूटराइज्ड लॉटरी सिस्टम के जरिए लगभग एक हजार तीर्थयात्रियों का चयन करता है, और इन सरकारी मार्गों पर प्रति व्यक्ति लगभग दो लाख रुपये का खर्च आता है।

​सीमित सीटों और लॉटरी प्रणाली के कारण कई श्रद्धालु नेपाल के रास्ते निजी ऑपरेटरों की प्राइवेट यात्रा चुनते हैं। काठमांडू से शुरू होने वाले इन नेपाल रूटों में रसुवा और हिल्सा प्रमुख हैं। सड़क मार्ग द्वारा रसुवा से यात्रा पूरी करने में लगभग 10 से 14 दिन लगते हैं, जबकि नेपालगंज और सिमिकोट-हिल्सा के रास्ते हेलीकॉप्टर से जाने पर 5 से 11 दिन का समय लगता है।

​यात्रा विशेषज्ञों के अनुसार, हर साल मई से सितंबर के बीच इन मार्गों पर बड़ी संख्या में यात्री पहुंचते हैं। इसके लिए केवल एक वैध पासपोर्ट और विशेष चीनी परमिट (चीनी ग्रुप वीजा और तिब्बत यात्रा परमिट) की आवश्यकता होती है। सुविधाओं के स्तर के आधार पर काठमांडू से शुरू होने वाली इस निजी यात्रा का खर्च तीन लाख रुपये से अधिक तक पहुंच सकता है।

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