February 25, 2026

उत्तराखंड हल्द्वानी के बनभूलपुरा मे रेलवे की करीब 30 हेक्टेयर जमीन से हटेगा अवैध अतिक्रमण, सुप्रीम कोर्ट ने विस्थापन और पुनर्वास के प्रोसेस पर की सुनवाई,,,,

उत्तराखंड हल्द्वानी के बनभूलपुरा मे रेलवे की करीब 30 हेक्टेयर जमीन से हटेगा अवैध अतिक्रमण, सुप्रीम कोर्ट ने विस्थापन और पुनर्वास के प्रोसेस पर की सुनवाई,,,,

देहरादून: हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे की करीब 30 हेक्टेयर जमीन पर किया गया अवैध अतिक्रमण हटाया जाएगा। इस बहुप्रतीक्षित मामले पर सुनवाई करते हुए आज सुप्रीम कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने के लिए विस्थापन और पुनर्वास के प्रोसेस पर सुनवाई की।

सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि कब्जा करने वाले लोगों को यह अधिकार नहीं है कि वो उसी जगह पर रहने की व्यवस्था की मांग करें। यह ज़मीन रेलवे की है। रेलवे ही तय करेगा कि इस जमीन पर का उपयोग कैसे किया जाए। कोर्ट ने ये भी साफ किया कि इस जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए 19 मार्च के बाद सर्वे शुरू किया जाएगा। जिसमें देखा जाए कि करीब 4500 घरों में से किसके पास पीएम आवास योजना के तहत घर पाने की एलिज‍बिलिटी है।

बता दें कि इंदिरा नगर, बनभूलपुरा, छोटी लाइन, गफूर बस्ती और लाइन नंबर इलाके में रेलवे की जडमीन पर अतिक्रमण का मुद्दा लंबे समय से विवाद में रहा है। उत्तराखंड हाईकोर्ट इस अतिक्रमण को हटाने का फैसला दे चुका है। लेकिन अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से पहले हल्द्वानी में तनाव हो गया था जिसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट चला गया था।

मंगलवार को करीब 55 मिनट तक चली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला देते हुए मामले के हर पहलू पर गौर किया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि लोग आखिर अतिक्रमण वाली जमीन पर रहने के लिए क्यों अड़े हैं, जबकि बेहतर सुविधाओं के साथ दूसरी जगह बसाया जा सकता है। लोग ये तय नहीं कर सकते कि रेलवे को उस जमीन का क्या उपयोग करना है। जस्टिस जोयमाला बागची ने कहा कि इसमे कोई दोराय नहीं कि जमीन सरकार की है। और सरकारी ही तय कर सकती है कि उस जमीन पर क्या बनेगा क्या नहीं।

चीफ जस्टिस ने कहा कि इस बात का पता करें कि क्या सरकार पीएम आवास योजना के तहत कोई जमीन पुनर्वास के लिए ले सकती है? क्या मुआवजा देने की बजाए आवास योजना से घऱ बनाकर प्रभावितों को नहीं दिया जा सकता? प्रभावित लोग दूसरी जगह पर विस्थापन औऱ पुनर्वास के लिए आवेदन कर सकते हैं। लेकिन सरकार ये तय करे कि सभी प्रभावित पुनर्वास के लिए योग्य हैं या नहीं। इसके लिए 19 मार्च के बाद वहां सर्वे कराया जाए। कोर्ट ने कहा कि विस्थापित होने की सूरत में सामूहिक रूप से शिफ्टेड परिवारों को 6 महीने तक प्रति महीने 2 हजार रुपए दिए जाएं।

कोर्ट ने नैनीताल डीएम और प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित लोगों तक पीएम आवास योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन पत्रों की कॉपी भेजी जाए। कानून सचिव पुनर्वास के लिए बनभूलपुरा में कैंप लगाएं। और सुनिश्चित करें कि हर प्रभावित परिवार को योजना के तहत लिया जाए।

कोर्ट ने आदेश दिया कि 31 मार्च से पहले इस सारी प्रक्रिया को किया जाए ताकि व्यावहारिक हल निकाला जा सके। मामले की अगली सुनवाई तक रेलवे जमीन पर अतिक्रमण हटाने की कोई कार्रवाई नहीं होगी।

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