उत्तराखंड ऋषिकेश में भारतीय अभिनेत्री और मॉडल दीप्ति भटनागर ने गंगा आरती कर स्वामी चिदानन्द सरस्वती से लिया आशीर्वाद,,,,

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन, जो अपनी विश्व विख्यात गंगा आरती और आध्यात्मिक साधना के लिए विख्यात है, यहां पूर्व भारतीय अभिनेत्री और मॉडल दीप्ति भटनागर दर्शनार्थ आयी। उन्होंने विश्व विख्यात परमार्थ गंगा आरती में सहभाग किया।
पूर्व अभिनेत्री दीप्ति भटनागर ने पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी से भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। स्वामी जी ने चर्चा के दौरान गंगाजी की महत्ता, पर्यावरण संरक्षण का संदेश और आध्यात्मिक मूल्यों को साझा किया। दीप्ति ने इस मुलाकात को बेहद प्रेरक और दार्शनिक अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि स्वामी जी के शब्दों ने उनके जीवन को सशक्त दृष्टिकोण और मानसिक स्थिरता देने का कार्य किया।
उन्होंने कहा कि दिव्य गंगा आरती का दृश्य उन्हें जीवन में आत्मिक जागरूकता और जीवन की पवित्रता का स्मरण कराता है। उनके अनुसार, आधुनिक जीवन की भाग-दौड़ में अक्सर लोग अपने अंदर की शांति और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी भूल जाते हैं। इस अवसर ने उन्हें यह स्मरण कराया कि धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों का अनुसरण करना तथा जीवन के प्रत्येक कर्म में नैतिक और आध्यात्मिक दिशा बनाए रखना है।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भारत सहित विश्व के लिए यह समय आध्यात्मिक जागरूकता और मानवता के संदेश को पुनः स्मरण करने का है। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर जयंती, सत्य, अहिंसा और करुणा के आदर्शों को आत्मसात करने का अवसर है।
स्वामी जी ने कहा कि भगवान महावीर का जीवन और उनके शिक्षण आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितना उनके समय में थे। उनका संदेश सरल, लेकिन गहन है-सत्य बोलो, अहिंसा अपनाओ और सभी जीवों के प्रति करुणा रखो। ये सिद्धांत न केवल व्यक्तिगत जीवन को शांति और संतुलन देते हैं, बल्कि समाज में सामंजस्य, सहिष्णुता और मानव कल्याण को भी सुनिश्चित करते हैं। आधुनिक जीवन की आपाधापी, तनाव और प्रतिस्पर्धा में, इन आदर्शों का अनुसरण करके हम आत्मिक शांति और मानसिक स्थिरता प्राप्त कर सकते हैं।
अहिंसा, महावीरजी का मुख्य संदेश है जो केवल शारीरिक हिंसा से परहेज नहीं है, बल्कि वाणी और विचारों में भी शांति और प्रेम बनाए रखने की कला है। जो हमें यह संदेश देता है कि प्रत्येक जीव, चाहे मानव हो या पशु-पक्षी, समान सम्मान और करुणा के पात्र हैं।
उनका सत्य और करुणा का संदेश भी आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक है। जब दुनिया में भ्रम, हिंसा और असमानता बढ़ रही है, भगवान महावीर की शिक्षा हमें यह मार्गदर्शन देती है कि सत्य के मार्ग पर चलना और सभी के प्रति करुणा रखना ही वास्तविक मानवता है। यही मूल्य हमारे व्यक्तिगत जीवन, सामाजिक संबंधों और वैश्विक समुदाय के लिए मार्गदर्शक हैं।
इस महावीर जयंती पर, आइए सत्य, अहिंसा और करुणा को अपने जीवन का मूल उद्देश्य बनाएं। यही मार्ग है जो हमें आत्मिक शांति, समाजिक सद्भाव और मानव कल्याण की ओर ले जाता है।
दीप्ति भटनागर जी को पूज्य स्वामी जी और साध्वी जी ने रूद्राक्ष का पौधा देकर उनका अभिनन्दन किया।

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