उत्तराखंड किशाऊ जलविद्युत एवं सिंचाई परियोजना के नए डिजाइन पर बनी सहमति, जल्द बनेगा देश का दूसरा सबसे ऊंचा दूसरा बांध,,,

देहरादून: करीब छह दशकों से फाइलों और कागजों में उलझी किशाऊ जलविद्युत एवं सिंचाई परियोजना अब धरातल पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के नए डिजाइन पर अपनी सहमति दे दी है। संशोधित डिजाइन के बाद अब यह बांध 232.6 मीटर ऊंचा होगा, जो उत्तराखंड के टिहरी बांध (260.5 मीटर) के बाद देश का दूसरा सबसे ऊंचा बांध बन जाएगा।
केंद्रीय जल आयोग (CWC) और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने इस नए तकनीकी स्वरूप को अपनी मंजूरी दे दी है। हालांकि, संशोधित लागत और जल-विद्युत घटकों की अंतिम स्वीकृति अभी केंद्र सरकार के स्तर पर लंबित है।
1. जलाशय का दायरा बढ़ा: 23,781 करोड़ लीटर अतिरिक्त पानी का होगा संग्रह
नई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के अनुसार, बांध की ऊंचाई में मामूली कमी की गई है, लेकिन इसके जलाशय का दायरा बढ़ा दिया गया है।
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- जीवंत भंडारण क्षमता: पहले की 1324 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) से बढ़ाकर अब 1561.91 MCM कर दी गई है।
- अतिरिक्त जल भंडारण: जलाशय में अब 237.81 MCM (करीब 23,781 करोड़ लीटर) अतिरिक्त पानी संग्रहित किया जा सकेगा।
लाभ: इस अतिरिक्त पानी का उपयोग मानसून के दौरान जल संरक्षण करने और गैर-मानसूनी महीनों में यमुना बेसिन के राज्यों के लिए पेयजल, सिंचाई व नदी प्रवाह प्रबंधन को मजबूत करने में किया जाएगा।
2. कम ऊंचाई से घटेंगे निर्माण और भूकंपीय जोखिम
भूगर्भीय और भूकंपीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए बांध की ऊंचाई को 236 मीटर से घटाकर 232.6 मीटर तय किया गया है। ऊंचाई कम होने से निर्माण संबंधी जोखिम काफी कम होंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंचाई कम करने के बावजूद भंडारण क्षमता का बढ़ना यह दर्शाता है कि जलाशय के डिजाइन को सुरक्षा और उपयोगिता के लिहाज से अधिक प्रभावी बनाया गया है।
3. स्थापित क्षमता घटी, लेकिन सालाना बिजली उत्पादन में बढ़ोतरी
परियोजना के तकनीकी ढांचे में एक और बड़ा बदलाव बिजली उत्पादन को लेकर किया गया है:
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मानक |
पुराना ढांचा |
नया संशोधित ढांचा |
बदलाव/लाभ |
|---|---|---|---|
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स्थापित क्षमता (Installed Capacity) |
660 मेगावाट |
422 मेगावाट |
238 मेगावाट की कमी |
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वार्षिक ऊर्जा उत्पादन (Annual Generation) |
1379 मिलियन यूनिट (MU) |
1457 मिलियन यूनिट (MU) |
दक्षता में सुधार: स्थापित क्षमता घटाने के पीछे मुख्य उद्देश्य कम पानी की उपलब्धता में भी निरंतर और अधिक बिजली उत्पादन करना है। इससे परिचालन लागत (Operating Cost) में कमी आएगी और मशीनों की कार्यक्षमता (Efficiency) बढ़ेगी।
परियोजना के मुख्य प्रभाव
- बेहतर जल प्रबंधन: मानसून के अधिशेष पानी का सालभर उचित इस्तेमाल।
- अंतर-राज्यीय लाभ: यमुना बेसिन से जुड़े राज्यों को सिंचाई और पेयजल संकट से मिलेगी मुक्ति।
- हरित ऊर्जा: पर्यावरण और सुरक्षा मानकों के अनुरूप अधिक कुशल बिजली उत्पादन।

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