August 13, 2026

उत्तराखंड नैनीताल दूषित पानी से गांवों में फैला पीलिया और डायरिया का प्रकोप, ज्यूलिकोट में 20 से अधिक छात्रों में संक्रमण की पुष्टि, ग्रामीणों में भारी गुस्सा,,,

उत्तराखंड नैनीताल दूषित पानी से गांवों में फैला पीलिया और डायरिया का प्रकोप, ज्यूलिकोट में 20 से अधिक छात्रों में संक्रमण की पुष्टि, ग्रामीणों में भारी गुस्सा,,,

नैनीताल। पर्यटन नगरी नैनीताल से लगे ग्रामीण अंचलों में दूषित पेयजल की आपूर्ति ने जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर संकट पैदा कर दिया है। वीरभट्टी, छिंडां मल्ला, गांजा, बगरीखोड़, छिंडां तल्ला और सड़ियाताल समेत कई गांवों के ग्रामीण पिछले कुछ दिनों से जल संस्थान की दूषित जलापूर्ति के कारण बीमारियों की चपेट में हैं। स्थिति की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि क्षेत्र की लगभग 50 फीसदी आबादी पेट संबंधी बीमारियों से जूझ रही है।

🔴 स्कूलों में पसर रही दहशत

स्वास्थ्य संकट की गूंज ज्यूलिकोट स्थित एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान तक पहुंच गई है। स्कूल के 20 से अधिक छात्रों में पीलिया के लक्षण मिलने और पुष्टि होने के बाद प्रबंधन ने तत्काल प्रभाव से विद्यालय में आपातकालीन अवकाश घोषित कर दिया है। एहतियातन स्कूल को अब आगामी 1 सितंबर तक बंद रखने का निर्णय लिया गया है।

🔴 सीवर और पेयजल लाइन का मिश्रण?

ग्रामीणों का आरोप है कि जल संस्थान जिस पाइपलाइन से जलापूर्ति कर रहा है, उसमें लगातार गंदगी देखी जा रही है। ग्रामीणों को प्रबल आशंका है कि पेयजल लाइनों में सीवर का गंदा पानी रिसकर मिल रहा है। इस पानी के सेवन से लोग पीलिया, डायरिया, तीव्र बुखार, उल्टी-दस्त और पेचिश जैसी समस्याओं से बुरी तरह प्रभावित हैं। क्षेत्र के बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक इस संक्रमण की चपेट में हैं।

🔴 पूर्व में भी मिल चुकी हैं शिकायतें

यह समस्या कोई नई नहीं है। इससे पहले भी इन इलाकों में दूषित पानी की शिकायतें प्रशासन तक पहुंचती रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पहले किए गए दावे और स्वास्थ्य शिविर केवल औपचारिक बनकर रह गए, जिससे समस्या का कोई स्थायी निदान नहीं हो पाया।

🔴 प्रशासन से आर-पार की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन और जल संस्थान से कड़ा रुख अपनाते हुए अब अस्थायी राहत के बजाय स्थायी समाधान की मांग की है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि केवल पानी के सैंपल लेने से काम नहीं चलेगा। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  • ​पेयजल पाइपलाइन की वैज्ञानिक जांच कराई जाए।
  • ​सीवर रिसाव के वास्तविक कारणों का पता लगाकर उन्हें अविलंब ठीक किया जाए।
  • ​प्रभावित गांवों में वैकल्पिक जलापूर्ति की व्यवस्था तुरंत शुरू हो।

​फिलहाल, पूरा क्षेत्र संक्रमण के साये में है और ग्रामीण प्रशासन की आगामी कार्रवाई एवं समस्या के निसरण का इंतजार कर रहे हैं।

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