August 31, 2026

उत्तराखंड हल्द्वानी में हाई कोर्ट के नए भवन का प्रस्ताव तैयार: ऑनलाइन डेटा सेंटर और 8000 वाहनों की पार्किंग जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी शामिल,,,

उत्तराखंड हल्द्वानी में हाई कोर्ट के नए भवन का प्रस्ताव तैयार: ऑनलाइन डेटा सेंटर और 8000 वाहनों की पार्किंग जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी शामिल,,,

​देहरादून। हल्द्वानी के बेलबाबा के पास प्रस्तावित हाई कोर्ट के नए भवन और परिसर को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। तैयार किए गए प्रस्ताव के मुताबिक, इस नए परिसर में ऑनलाइन डेटा सेंटर, ऑनलाइन पार्किंग और एक विशाल सभागार जैसी कई जरूरी सुविधाएं विशेष रूप से उपलब्ध कराई जाएंगी। वर्तमान में लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) का पूरा फोकस वनभूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने पर है।

🟢 बराबर क्षेत्रफल की जमीन से सुलझा वन भूमि का पेंच

​हाई कोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी शिफ्ट करने के लिए शासन ने बेलबाबा के पास तराई केंद्रीय डिवीजन की भाखड़ा रेंज में 30 हेक्टेयर जमीन का चयन किया है। इस पूरी प्रक्रिया में लोनिवि को वनभूमि हस्तांतरण के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है। राहत की बात यह है कि पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के एवज में दोगुनी के बजाय ठीक बराबर यानी 30 हेक्टेयर राजस्व भूमि मिल जाने से काम आसान हो गया है। ईई प्रत्यूष कुमार के अनुसार, बेतालघाट ब्लॉक के ग्राम हल्दियानी पट्टी जोशीखोला में राजस्व भूमि मिलने के बाद 19 अगस्त को संयुक्त टीम इसका निरीक्षण भी कर चुकी है। इस भूमि के आधार पर अब बेलबाबा की जमीन के हस्तांतरण के लिए औपचारिक आवेदन किया जाएगा।

🟢 आठ हजार वाहनों की पार्किंग और भवनों का खाका

​प्रस्तावित हाई कोर्ट परिसर में वाहनों की सुगम व्यवस्था के लिए विशेष ध्यान रखा गया है। विभिन्न पार्किंग स्थलों को मिलाकर इनकी कुल क्षमता करीब आठ हजार वाहनों की होगी। इसके अलावा, कोर्ट संख्या के आधार पर बनने वाले अलग-अलग ब्लॉकों में भी भूमिगत पार्किंग के निर्माण को प्रस्ताव में शामिल किया गया है। विभाग के अनुसार, वनभूमि के संबंध में सैद्धांतिक स्वीकृति मिलने के बाद ही डिजाइन और डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार करने के लिए किसी प्रतिष्ठित कंपनी का चयन किया जाएगा।

🟢 गौलापार के प्रस्ताव में आई थी अड़चन

​गौरतलब है कि हाई कोर्ट शिफ्टिंग को लेकर पूर्व में गौलापार स्थित तराई पूर्वी डिवीजन की जमीन पर सर्वे किया गया था, जहां पेड़ों की गिनती के साथ प्राथमिक सर्वे भी पूरा हो चुका था। डिजाइन और डीपीआर के लिए शासन से 13 लाख रुपये की स्वीकृति भी मिली थी, लेकिन केंद्रीय वन मंत्रालय द्वारा आपत्ति जताए जाने के बाद उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया था, जिसके चलते वे 13 लाख रुपये शासन को वापस लौटाने पड़े थे। अब बेलबाबा क्षेत्र में प्रक्रिया आगे बढ़ने से एक बार फिर निर्माण की उम्मीदें तेज हो गई हैं।

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