September 28, 2026

उत्तराखंड गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में हुआ संवाद सत्र का आयोजन, गुरुकुल परंपरा और संस्कारों से ही संभव है स्वस्थ समाज का निर्माण – प्रो. दिनेश चंद्र शास्त्री

उत्तराखंड गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में हुआ संवाद सत्र का आयोजन, गुरुकुल परंपरा और संस्कारों से ही संभव है स्वस्थ समाज का निर्माण – प्रो. दिनेश चंद्र शास्त्री

​

​हरिद्वार। ऋषिहुड विश्वविद्यालय, सोनीपत के प्राध्यापकों, अधिकारियों एवं छात्र-छात्राओं के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान विश्वविद्यालय सभागार में आयोजित संवाद सत्र में आगंतुक दल को भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक मूल्यों और गुरुकुल की समृद्ध ऐतिहासिक धरोहर से अवगत कराया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को गुरुकुल कांगड़ी के गौरवशाली इतिहास पर आधारित एक वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) भी दिखाई गई।

​कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. दिनेश चंद्र शास्त्री ने भारतीय शिष्टाचार और पारिवारिक संस्थाओं के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में ‘नमस्ते’ का मूल भाव सामने वाले के प्रति नतमस्तक होकर हृदय की सच्ची भावनाओं और समर्पण को व्यक्त करता है, जिसकी पूर्ति पश्चिमी या अंग्रेजी संबोधन नहीं कर सकते। वर्तमान सामाजिक परिवेश पर विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ जैसी प्रवृत्तियां दूषित सामाजिक मानसिकता का परिचायक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय जीवन दर्शन में विवाह संस्कार के बिना जीवन अपूर्ण है, क्योंकि संस्कार ही समाज और परिवार को स्थिरता प्रदान करते हैं।

​विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. सत्यदेव निगमालंकार ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को केवल वैश्विक बाजार का उपभोगकर्ता या हिस्सा बनने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें अपनी समृद्ध संस्कृति और मूल्यों का सच्चा संवाहक बनना चाहिए।

​ऋषिहुड विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि अन्नु वासुदेव ने गुरुकुल परिसर के वातावरण की सराहना करते हुए कहा कि गुरुकुल में भारतीय संस्कृति की पावन सुगंध का साक्षात्कार करना अत्यंत सुखद और प्रेरणादायी अनुभव है।

​शैक्षणिक भ्रमण (विजिट) के संयोजक डॉ. श्वेतांक आर्य ने कहा कि ऐसे अंतर-विश्वविद्यालयी आयोजनों से विद्यार्थियों को प्राचीन ज्ञान परंपरा और ऐतिहासिक विरासत को निकटता से समझने का व्यावहारिक अवसर मिलता है।

​इस अवसर पर प्रो. पंकज मदान, प्रो. एल.पी. पुरोहित, डॉ. विपुल भट्ट, डॉ. भारत वेदालंकार सहित अनेक शिक्षक, अधिकारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

You may have missed

Share