उत्तराखंड एम्स ऋषिकेश में आउटसोर्स एजेंसी को फिर मिल सकता है सेवा विस्तार, टेंडर प्रक्रिया में देरी पर उठे सवाल,,,

ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ऋषिकेश में आउटसोर्स कर्मचारियों की व्यवस्था को लेकर एक बार फिर पुरानी एजेंसी के ही सेवा में बने रहने के संकेत मिल रहे हैं। आगामी 30 सितंबर को मौजूदा एजेंसी की समयावधि समाप्त हो रही है, लेकिन अब तक नई निविदा (टेंडर) प्रक्रिया शुरू न होने के कारण इसे छह महीने का अतिरिक्त विस्तार मिलने की पूरी संभावना बन गई है।
बार-बार सेवा विस्तार पर खड़े हुए सवाल
एम्स प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर बिना नई प्रक्रिया के बार-बार पुरानी एजेंसी को ही सेवा विस्तार क्यों दिया जा रहा है। जानकारों का मानना है कि इस प्रकार की लेटलतीफी के पीछे संस्थान के कुछ चुनिंदा अधिकारियों को विशेष लाभ मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
गौर करने वाली बात यह है कि मौजूदा आउटसोर्स एजेंसी को इससे पहले भी दो बार सेवा अवधि का विस्तार दिया जा चुका है। जानकारों के अनुसार, यदि अब भी नई टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाती है, तो निविदा जारी होने, नई फर्म के चयन और उसके कार्यभार संभालने में कई महीनों का समय लग जाएगा, जिसके चलते पुरानी एजेंसी का अगले छह माह तक कार्यभार संभालना तय माना जा रहा है।
किच्छा सेटेलाइट सेंटर और संदिग्ध भूमिका
एक तरफ जहां एम्स प्रशासन आगामी अक्टूबर माह में किच्छा स्थित सेटेलाइट सेंटर का संचालन शुरू करने की तैयारी कर रहा है, जहां शुरुआती दौर में नर्सिंग और अन्य स्टाफ की आउटसोर्सिंग के जरिए भारी आवश्यकता होगी; वहीं दूसरी ओर इस पूरी व्यवस्था पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं।
- किच्छा में स्टाफ तैनाती के दौरान सामने आए फर्जीवाड़े के प्रकरण में भी इसी एजेंसी की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी।
- इसके अतिरिक्त, एम्स परिसर में कार्यरत एजेंसी का मैनेजर ‘विनायक’ पिछले कई दिनों से नदारद है और उसका मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ आ रहा है।
इन तमाम गंभीर विवादों और संदिग्ध परिस्थितियों के बावजूद एम्स प्रशासन द्वारा इसी एजेंसी को दोबारा समयावधि विस्तार दिए जाने की चर्चाएं जोरों पर हैं।
एम्स प्रशासन का पक्ष

इस पूरे मामले पर एम्स के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) डॉ. श्रीलॉय मोहंती का कहना है कि “टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा रही है। जल्द से जल्द सभी औपचारिकताओं को पूर्ण कर नए टेंडर जारी करने के कड़े प्रयास किए जा रहे हैं।”
अब देखना यह होगा कि प्रशासन के इन दावों के बीच क्या वाकई नई पारदर्शिता प्रक्रिया जल्द अमल में आती है या पुरानी एजेंसी को ही एक बार फिर सेवा विस्तार का लाभ मिलता है।

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