उत्तराखंड के हरिद्वार वन क्षेत्र में मखना हाथी की मौत, हाथियों का आपसी संघर्ष बना मौत की वजह, मृत हाथी पर बाघ के हमले के भी मिले निशान,,,,

हरिद्वार: हरिद्वार वन प्रभाग की श्यामपुर रेंज अंतर्गत खारा सेक्टर-2 बीट में एक मखना हाथी का शव मिलने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। वन विभाग के अनुसार प्रथम दृष्टया हाथी की मौत जंगल में आपसी संघर्ष के कारण हुई है। घायल अवस्था में उस पर बाघ के हमले की भी आशंका जताई जा रही है।
सोमवार सुबह नियमित गश्त के दौरान खारा यूनिट के वनकर्मियों को जंगल में एक हाथी लहूलुहान हालत में पड़ा मिला। सूचना मिलते ही एसडीओ पूनम कैंथोला, रेंज अधिकारी विनय राठी एवं पशु चिकित्सकों की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर आवश्यक जानकारी जुटाई।
रेंज अधिकारी विनय राठी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मृत हाथी की पहचान मखना (बिना दांत वाला) हाथी के रूप में हुई है। अनुमान है कि उसका सामना एक टस्कर हाथी से हुआ, जिसमें हुई टक्कर से वह गंभीर रूप से घायल हो गया। इसके बाद घायल अवस्था में बाघ ने भी उस पर हमला किया। हाथी के कान के पास और शरीर के अन्य हिस्सों पर बाघ के पंजों के निशान पाए गए हैं।
एसडीओ पूनम कैंथोला ने बताया कि चिकित्सकीय परीक्षण के बाद नियमानुसार हाथी का पोस्टमार्टम कराया गया और शव को मौके पर ही दफना दिया गया। पूरे मामले की जांच वन विभाग द्वारा की जा रही है।
बताया गया है कि मृत मखना हाथी बीते कई दिनों से झुंड से अलग होकर अकेले विचरण कर रहा था। इसी कारण उसके अन्य हाथियों से संघर्ष की संभावना बढ़ गई थी। वहीं इसी क्षेत्र में एक हथिनी भी कई दिनों से झुंड से अलग घूम रही है, जिस पर वन विभाग लगातार निगरानी बनाए हुए है।
क्या होता है मखना हाथी
मखना हाथी वह होता है जिसके दांत (टस्क) नहीं होते। यह कोई बीमारी नहीं बल्कि आनुवंशिक कारणों से होता है। ऐसे हाथी सामान्य रूप से स्वस्थ रहते हैं, लेकिन जंगल में टस्कर हाथियों के मुकाबले कमजोर माने जाते हैं, जिससे संघर्ष की स्थिति में इनके घायल होने की आशंका अधिक रहती है।

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