उत्तराखंड प्रकृति का कहर, धनोल्टी में भारी ओलावृष्टि से नकदी फसलें तबाह, किसानों की उम्मीदें मिट्टी में मिलीं,,,,

देहरादून/धनोल्टी: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम के बदले मिजाज ने एक बार फिर किसानों की कमर तोड़ दी है। सोमवार शाम धनोल्टी विधानसभा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत रौतू की बेली, फेडी-किमोड़ा और ब्रहमसारी में हुई भीषण ओलावृष्टि ने नकदी फसलों और बागवानी को भारी नुकसान पहुँचाया है। महज कुछ मिनटों के तांडव ने किसानों की महीनों की मेहनत को मलबे में तब्दील कर दिया।
प्रमुख बिंदु: तबाही का मंजर
- फसलों का विनाश: ओलावृष्टि के कारण खेतों में तैयार खड़ी नकदी फसलें (मटर, गोभी आदि) और फलदार वृक्ष पूरी तरह चकनाचूर होकर जमीन पर बिछ गए हैं।
- दोहरी मार: किसानों के अनुसार, अप्रैल माह में हुई ओलावृष्टि के घाव अभी भरे भी नहीं थे कि इस दूसरी आपदा ने रही-सही कसर भी पूरी कर दी।
- आजीविका पर संकट: स्थानीय ग्रामीणों की आय का मुख्य स्रोत यही मौसमी फसलें और उद्यान थे। अब उनके सामने परिवार के भरण-पोषण और भविष्य की चिंता खड़ी हो गई है।
मुआवजे और त्वरित कार्रवाई की मांग
क्षेत्र में छाई मायूसी के बीच जन प्रतिनिधियों ने सरकार और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।
”प्रशासन को तुरंत प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर नुकसान का सर्वे करना चाहिए। यदि किसानों को शीघ्र उचित मुआवजा नहीं मिला, तो क्षेत्र में आर्थिक संकट गहरा सकता है।”- रमेश विष्ट (क्षेत्र पंचायत सदस्य) एवं पूजा पंवार (ग्राम प्रधान)
प्रशासन से मुख्य मांगें:
- त्वरित सर्वे: राजस्व विभाग की टीम द्वारा तत्काल नुकसान का आकलन।
- उचित मुआवजा: प्रभावित किसानों को उनके आर्थिक नुकसान की भरपाई हेतु विशेष राहत पैकेज।
- बीमा योजनाओं का क्रियान्वयन: फसल बीमा योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना ताकि दावों का निपटान समय पर हो सके।
- स्थायी समाधान: भविष्य में ऐसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए तकनीकी और बुनियादी ढांचे (जैसे एंटी-हेल नेट्स) पर ध्यान देना।
प्रशासन से मुख्य मांगें:
- त्वरित सर्वे: राजस्व विभाग की टीम द्वारा तत्काल नुकसान का आकलन।
- उचित मुआवजा: प्रभावित किसानों को उनके आर्थिक नुकसान की भरपाई हेतु विशेष राहत पैकेज।
- बीमा योजनाओं का क्रियान्वयन: फसल बीमा योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना ताकि दावों का निपटान समय पर हो सके।
- स्थायी समाधान: भविष्य में ऐसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए तकनीकी और बुनियादी ढांचे (जैसे एंटी-हेल नेट्स) पर ध्यान देना।

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