October 15, 2026

उत्तराखंड हरिद्वार भ्रामक जानकारी और तय समय में सूचना न देने पर HRDA के लोक सूचना अधिकारी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना,,,

उत्तराखंड हरिद्वार भ्रामक जानकारी और तय समय में सूचना न देने पर HRDA के लोक सूचना अधिकारी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना,,,

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​हरिद्वार। राज्य सूचना आयोग ने हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) के लोक सूचना अधिकारी (पीआईओ) प्रशांत सेमवाल पर सूचना देने में अनावश्यक विलंब करने और भ्रामक जानकारी उपलब्ध कराने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

“राज्य सूचना आयोग की सख्त कार्रवाई- उपाध्यक्ष को मामले की विभागीय जांच कराने के दिए निर्देश”

इसके साथ ही आयोग ने प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को इस प्रकरण की विभागीय जांच कराने के भी निर्देश दिए हैं।

​🔴 उच्च न्यायालय में गलत शपथपत्र देने का भी आरोप

​यह पूरा मामला आरटीआई क्लब उत्तराखंड के सदस्य अजीत सिंह चौहान द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से संबंधित है। शिकायतकर्ता ने हरिद्वार की आवासीय कॉलोनियों में नियमों के विरुद्ध अवैध रूप से बने बहुमंजिला होटलों के खिलाफ उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) वर्ष 2024 में दायर की थी। उस दौरान प्राधिकरण ने उच्च न्यायालय में शपथपत्र देकर दावा किया था कि गायत्री विहार कॉलोनी का भू-उपयोग आवासीय से व्यावसायिक हो गया है। यह मामला वर्तमान में भी उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।

​🔴 36 दिन की देरी और भ्रामक जानकारी देने पर खुला मामला

​शपथपत्र के आधार पर अजीत सिंह ने प्राधिकरण से भू-उपयोग परिवर्तन से संबंधित तीन बिंदुओं पर आरटीआई के तहत सूचना मांगी थी।

  • ​लोक सूचना अधिकारी ने निर्धारित 30 दिनों की अवधि के बाद 36 दिन की देरी की और प्रथम अपील के बाद अतिरिक्त शुल्क की मांग की।
  • ​29 जुलाई 2025 को आवेदक को भ्रामक जानकारी दी गई।
  • ​दूसरी अपील के बाद भी 28 अक्टूबर 2025 को वही भ्रामक सूचना दोबारा भेज दी गई।

​🔴 आयोग की फटकार के बाद सचिव ने स्वीकारा सच

​मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सूचना आयुक्त दलीप सिंह कुंवर की कड़ी चेतावनी के बाद 23 जनवरी 2026 को प्राधिकरण के तत्कालीन सचिव आयोग के समक्ष पेश हुए। सचिव द्वारा प्रस्तुत की गई जानकारी में यह स्पष्ट हुआ कि हरिद्वार विकास प्राधिकरण ने उच्च न्यायालय में गलत शपथपत्र दाखिल किया था। सचिव ने यह भी स्वीकार किया कि गायत्री विहार का भू-उपयोग आवासीय से व्यावसायिक में परिवर्तित करने से संबंधित कोई भी दस्तावेज प्राधिकरण के पास उपलब्ध नहीं है।

​🔴 जांच और कार्रवाई के आदेश

​सूचना आयुक्त ने लोक सूचना अधिकारी प्रशांत सेमवाल को सूचना में जानबूझकर विलंब करने और भ्रामक जानकारी देने का दोषी मानते हुए उन पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। आयोग ने स्पष्ट किया कि इस विलंब की विभागीय जांच उपाध्यक्ष स्तर से कराई जाए और अधिकारी के स्तर पर हुई लापरवाही के अनुसार उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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