October 15, 2026

उत्तराखंड हरिद्वार से जूना अखाड़े की ऐतिहासिक पवित्र छड़ी यात्रा का हुआ भव्य आगाज, माया देवी मंदिर से 70 संतों का दल रवाना, राष्ट्रीय एकता और सनातन संस्कृति के संवर्धन का दिया संदेश,,,

उत्तराखंड हरिद्वार से जूना अखाड़े की ऐतिहासिक पवित्र छड़ी यात्रा का हुआ भव्य आगाज, माया देवी मंदिर से 70 संतों का दल रवाना, राष्ट्रीय एकता और सनातन संस्कृति के संवर्धन का दिया संदेश,,,

​हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार के सिद्धपीठ माया देवी मंदिर से श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े की पारंपरिक एवं ऐतिहासिक ‘पावन छड़ी यात्रा’ का वैदिक विधि-विधान व मंत्रोच्चार के साथ शुभारंभ किया गया। आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज तथा अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमंहत हरि गिरि महाराज ने विधिवत पूजा-अर्चना कर इस पवित्र यात्रा को रवाना किया। इस धार्मिक आयोजन के अवसर पर अखाड़े के संतों में विशेष उत्साह देखने को मिला।

​🏵 प्रशासनिक अधिकारियों की रही उपस्थिति

​शुभारंभ समारोह के दौरान संतों के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे। इनमें जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, कुंभ मेला अधिकारी सोनिका और अपर मेला अधिकारी दयानंद सरस्वती शामिल हुए तथा संतों से आशीर्वाद प्राप्त किया।

🏵 ​स्वामी वीरेंद्रानंद गिरि कर रहे हैं नेतृत्व

​लगभग 70 साधु-संतों, नागा संन्यासियों और श्रद्धालुओं का यह दल हिमालय पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी वीरेंद्रानंद गिरि महाराज के कुशल नेतृत्व में आगे बढ़ेगा। यात्रा की रवानगी के अवसर पर जूना अखाड़े के वरिष्ठ सभापति श्रीमंहत प्रेम गिरि महाराज, वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्रीमंहत महेश पुरी, श्रीमंहत केदारपुरी महाराज, महामंत्री श्रीमंहत शैलेंद्र गिरि और श्रीमंहत रामेश्वर गिरि सहित कई प्रमुख संत मौजूद रहे, जिन्होंने यात्रा की निर्विघ्न पूर्णता हेतु प्रार्थना की।

​🏵 विस्तृत यात्रा मार्ग और मुख्य पड़ाव

​यह पवित्र छड़ी यात्रा उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थ स्थलों की परिक्रमा करेगी:

  • ​चारधाम: यात्रा प्रमुख रूप से यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ धाम पहुंचेगी।
  • ​केदारखंड और मानसखंड: संतों का यह दल दोनों क्षेत्रों के पौराणिक तीर्थों, प्रमुख शक्तिपीठों, शिवालयों, सिद्धपीठों के साथ-साथ ‘ओम पर्वत’ और ‘आदि कैलाश’ का भी भ्रमण करेगा।

​🏵 उद्देश्य- राष्ट्रीय एकता, धर्म प्रचार और दिव्य कुंभ का आह्वान

  • ​सनातन परंपरा का संरक्षण: जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमंहत नारायण गिरि महाराज ने बताया कि यह छड़ी यात्रा सनातन धर्म की समृद्ध व प्राचीन परंपरा का प्रतीक है, जो गुरु-शिष्य परंपरा, त्याग, तपस्या और भारतीय आध्यात्मिक धरोहर को सजीव बनाए रखती है।

  • ​जन-जागरण व कुंभ संदेश: यात्रा का मूल उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक चेतना का प्रसार, सनातन मूल्यों का संवर्धन और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करना है। इसके साथ ही, विभिन्न तीर्थों में आगामी भव्य एवं दिव्य कुंभ दर्शन के लिए श्रद्धालुओं के बीच अलख भी जगाई जाएगी।

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