August 12, 2026

उत्तराखंड UKSSSC परीक्षा धांधली मामले में विशेष CBI अदालत ने आरोपियों के खिलाफ तय किए आरोप, 18 अगस्त को होगी अगली सुनवाई,,,

उत्तराखंड UKSSSC परीक्षा धांधली मामले में विशेष CBI अदालत ने आरोपियों के खिलाफ तय किए आरोप, 18 अगस्त को होगी अगली सुनवाई,,,

देहरादून। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े बहुचर्चित मामले में देहरादून की विशेष CBI अदालत ने एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अदालत ने मामले में आरोपी सुमन, मोहम्मद खालिद और साबिया के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त प्रथम दृष्टया आधार पाए हैं। मामले की अगली सुनवाई अब 18 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है, जिसमें औपचारिक रूप से आरोप गठन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

🟢 व्हाट्सएप के जरिए भेजे गए थे प्रश्न और उत्तर

​जांच एजेंसियों के अनुसार, 21 सितंबर 2025 को आयोजित UKSSSC स्नातक स्तरीय परीक्षा के दौरान आरोपी मोहम्मद खालिद परीक्षा केंद्र पर उपस्थित था। आरोप है कि उसने परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र के तीन पन्नों की तस्वीरें अपने मोबाइल फोन से खींचकर व्हाट्सएप के माध्यम से सुमन को भेजी थीं। इसके बदले में, सुमन ने कुछ बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQs) के हल वापस व्हाट्सएप पर साझा किए।

​अदालत में सुनवाई के दौरान सुमन के अधिवक्ता ने दलील दी कि उनकी मुक्किल को इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि भेजे गए प्रश्न UKSSSC परीक्षा से संबंधित हैं। आरोपी का पक्ष था कि खालिद ने उसे बताया था कि वह पेपर उसकी बहन का है, और उसने केवल सामान्य मदद के रूप में प्रश्नों के उत्तर बताए थे।

​हालांकि, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने इस तर्क का पुरजोर विरोध किया। CBI ने अदालत को बताया कि प्रश्नपत्र के पन्नों पर परीक्षा का QR कोड स्पष्ट रूप से मुद्रित था और सुमन ने अपनी संलिप्तता छिपाने के लिए संबंधित व्हाट्सएप चैट को अपने मोबाइल फोन से तुरंत डिलीट भी कर दिया था।

🟢 सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल साक्ष्य बने आधार

​अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी मोहम्मद खालिद का परीक्षा केंद्र बहादुरपुर जट स्थित आदर्श बाल सदन इंटर कॉलेज में था, जहां कुल 15 सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे। जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि परीक्षा शुरू होने के पश्चात खालिद करीब 11:30 बजे वॉशरूम गया था, और उसी दौरान प्रश्नपत्र के पन्ने व्हाट्सएप के माध्यम से बाहर सुमन तक पहुंचे थे।

​विशेष CBI अदालत ने केस डायरी, डिजिटल साक्ष्य और अन्य साक्ष्यों का बारीकी से अवलोकन करने के बाद स्पष्ट किया कि उपलब्ध सामग्री आरोपियों की संलिप्तता का प्रथम दृष्टया मजबूत संकेत देती है। अदालत ने माना कि वास्तविक परीक्षा प्रश्नपत्र के फोटो बाहर भेजकर उत्तर प्राप्त करना प्रतियोगी परीक्षाओं में अनुचित साधनों (Unfair Means) के प्रयोग की श्रेणी में आता है।

🟢 ​इन धाराओं के तहत दाखिल हुआ है आरोपपत्र

​CBI ने इस मामले में तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2), 238, 241 और 318(4) के साथ-साथ ‘उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम और निवारण के उपाय) अधिनियम, 2023’ की धारा 12(1) और 12(2) के अंतर्गत आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल किया है।

​यह पूरा घटनाक्रम एक बार फिर से राज्य की प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, सुरक्षा और शुचिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है, जिस पर अदालत के आगामी रुख और फैसलों पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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