August 25, 2026

उत्तराखण्ड शिक्षा में धामी सरकार ने किया बड़ा प्रशासनिक बदलाव, प्रदेश में अब मदरसा बोर्ड समाप्त, ‘अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ का गठन,,,,

उत्तराखण्ड शिक्षा में धामी सरकार ने किया बड़ा प्रशासनिक बदलाव, प्रदेश में अब मदरसा बोर्ड समाप्त, ‘अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ का गठन,,,,

देहरादून: उत्तराखण्ड सरकार ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए मदरसा बोर्ड को समाप्त कर उसकी जगह उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम में नए प्राधिकरण का विधिवत शुभारंभ किया और विभिन्न अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण-पत्र वितरित किए। इस दौरान विद्यार्थियों को एनसीईआरटी की पुस्तकें भी भेंट की गईं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय किसी समुदाय की परंपरा या पहचान को प्रभावित करने के लिए नहीं, बल्कि सभी अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लिया गया है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, गणित, कंप्यूटर, डिजिटल तकनीक और कौशल विकास पर विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि कोई भी बच्चा भविष्य की दौड़ में पीछे न रह जाए।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड ज्ञान और संस्कृति की भूमि है तथा राज्य को शिक्षा के क्षेत्र में देश का आदर्श मॉडल बनाने की दिशा में यह ऐतिहासिक कदम है। मुख्यमंत्री के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप गठित अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण केवल संस्थानों को मान्यता देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, पारदर्शिता और कौशल आधारित शिक्षण व्यवस्था को भी मजबूत करेगा।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आज का दौर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग और डिजिटल तकनीक का है। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था को समय के अनुरूप बदलना आवश्यक है। सरकार का उद्देश्य बच्चों को उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखते हुए आधुनिक और रोजगारपरक शिक्षा प्रदान करना है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को आत्मनिर्भर, जागरूक और सशक्त बनाने का सबसे प्रभावी साधन है। नई व्यवस्था के तहत पहले जिन अल्पसंख्यक वर्गों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाते थे, उन्हें भी समान प्रतिनिधित्व और बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण आने वाले वर्षों में हजारों बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा और राज्य को समावेशी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाएगा। उन्होंने धर्मगुरुओं, शिक्षाविदों और शिक्षण संस्थानों से इस नई पहल को सफल बनाने में सहयोग की अपील भी की।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक प्रदीप बत्रा, विधायक उमेश शर्मा काऊ, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह सहित विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के धर्मगुरु, शिक्षाविद और शिक्षण संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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