August 28, 2026

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना अंतिम चरण में, पहाड़ों का सफर होगा आसान, मात्र ढाई घंटे में तय होगी 125 किमी की दूरी,,,

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना अंतिम चरण में, पहाड़ों का सफर होगा आसान, मात्र ढाई घंटे में तय होगी 125 किमी की दूरी,,,

देहरादून: उत्तराखंड के दुर्गम पर्वतीय इलाकों को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला केंद्र और राज्य सरकार का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ‘ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना’ अब अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुका है। लगभग 125 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन राज्य के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य को बदलने में मील का पत्थर साबित होगी।

​उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परियोजना की प्रगति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में डबल इंजन सरकार देवभूमि को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इस परियोजना के पूरा होने से पर्वतीय क्षेत्रों में कनेक्टिविटी मजबूत होगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

🟢 आसान और सुरक्षित सफर

ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक सड़क मार्ग से सफर तय करने में जहां वर्तमान में 6 से 7 घंटे का समय लगता है, वहीं ट्रेन शुरू होने के बाद यह यात्रा सिमटकर मात्र 2 से 2.5 घंटे की रह जाएगी। इसके अलावा, बरसात के मौसम में भूस्खलन और सड़कों के बंद होने की समस्या से भी यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

🟢 चारधाम यात्रा और पर्यटन को प्रोत्साहन

यह नई रेल लाइन बद्रीनाथ और केदारनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं के मार्ग को बेहद सुगम बनाएगी। देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग और कर्णप्रयाग जैसे प्रमुख स्टेशनों पर कनेक्टिविटी बढ़ने से होटल, होम-स्टे, परिवहन और गाइड जैसे क्षेत्रों से जुड़े स्थानीय लोगों की आय में भारी उछाल आने की उम्मीद है।

🟢 पलायन पर रोक और आर्थिक विकास

पर्वतीय क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और मडुआ, सेब व जड़ी-बूटियों जैसे स्थानीय उत्पादों को नया वैश्विक बाजार मिलेगा। पहाड़ों में स्वरोजगार और व्यापार के अवसर बढ़ने से युवाओं को काम की तलाश में मैदानी इलाकों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा।

🟢 रणनीतिक और सामरिक महत्व

चीन सीमा के समीप स्थित होने के कारण यह रेलवे परियोजना भारतीय सेना की त्वरित आवाजाही और रसद आपूर्ति के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही, आपातकालीन चिकित्सा स्थितियों में पहाड़ी क्षेत्रों के मरीजों को ऋषिकेश या एम्स देहरादून तक पहुंचाना बेहद आसान हो जाएगा।

🟢 इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना

लगभग 125 किलोमीटर लंबी इस संपूर्ण परियोजना का 100 किलोमीटर से अधिक हिस्सा जटिल सुरंगों के माध्यम से तैयार किया जा रहा है। इस मार्ग पर कुल 12 अत्याधुनिक स्टेशन बनाए जा रहे हैं, जो गढ़वाल क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों को आपस में जोड़ेंगे।

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