October 25, 2026

देश में चीनी की किल्लत और कीमतों में उछाल, ब्राजील पर बढ़ी निर्भरता, सरकार ने दिसंबर तक बढ़ाई इन देशों की आयात छूट-  SPACIAL Bulletin

देश में चीनी की किल्लत और कीमतों में उछाल, ब्राजील पर बढ़ी निर्भरता, सरकार ने दिसंबर तक बढ़ाई इन देशों की आयात छूट-  SPACIAL Bulletin

देहरादून। भारत के घरेलू बाजार में गन्ने की आपूर्ति में कमी और आगामी त्योहारी सीजन की मांग के चलते चीनी की कीमतों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई है। खुदरा बाजार में चीनी के दाम जुलाई के ₹48.18 प्रति किलो से बढ़कर अक्टूबर 2026 में ₹58.32 प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। इस घरेलू कमी को पाटने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी (Raw Sugar) के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी थी, जिसकी समयसीमा को आगे बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दिया गया है। अब तक लगभग 2.6 लाख टन चीनी भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच चुकी है।

​प्रमुख आपूर्तिकर्ता देशों का तुलनात्मक विवरण

​भारत की चीनी आपूर्ति में दक्षिण अमेरिकी देश ब्राजील का दबदबा बना हुआ है, जिसकी कुल आयात में 90% से 97% तक की हिस्सेदारी है। इसके अतिरिक्त दक्षिण अफ्रीका तथा कुछ यूरोपीय व एशियाई देशों से भी खेप मंगाई गई है।

देश

आयात अवधि

आयात मूल्य (अमेरिकी डॉलर)

अनुमानित मूल्य (भारतीय रुपये)

बाजार हिस्सेदारी / स्थिति

ब्राजील (Brazil)

केवल अगस्त माह

10.959 करोड़ डॉलर

लगभग ₹921 करोड़

सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता (90%–97% हिस्सेदारी)

दक्षिण अफ्रीका (South Africa)

अप्रैल – अगस्त

2.017 करोड़ डॉलर

लगभग ₹169 करोड़

दूसरा बड़ा वैकल्पिक बाजार

बेल्जियम (Belgium)

अगस्त माह

6.70 लाख डॉलर

लगभग ₹5.6 करोड़

यूरोपीय आपूर्तिकर्ता

जर्मनी (Germany)

अगस्त माह

5.50 लाख डॉलर

लगभग ₹4.6 करोड़

यूरोपीय आपूर्तिकर्ता

मलेशिया (Malaysia)

अगस्त माह

5.20 लाख डॉलर

लगभग ₹4.3 करोड़

एशियाई आपूर्तिकर्ता

फ्रांस (France)

अगस्त माह

4.00

घरेलू कीमतों में उतार-चढ़ाव: जुलाई बनाम अक्टूबर

समयावधि

खुदरा मूल्य (प्रति किलोग्राम)

शुद्ध बदलाव

प्रतिशत वृद्धि

20 जुलाई 2026

₹48.18

बेसलाइन

—

अक्टूबर 2026

₹58.32

+₹10.14

कीमतों को नियंत्रित रखने और जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने डीलरों पर स्टॉक लिमिट लागू करने के साथ-साथ आयात छूट की समयसीमा बढ़ाई है, ताकि घरेलू उपलब्धता सुचारू बनी रहे।

​संकेत:- सरकार के इस फैसले और चीनी आयात नीति के ताजा विश्लेषण को समझने के लिए Sugar Import Duty Extension Analysis वीडियो देखें। यह वीडियो शुल्क-मुक्त आयात की समयसीमा बढ़ाने और खुदरा कीमतों पर इसके असर को स्पष्ट रूप से समझाता है।

,🔴 Sugar Import Duty Extension Analysis 

चीनी आयात शुल्क विस्तार का मुख्य डेटा और विश्लेषण

वर्तमान में सामान्य परिस्थितियों में भारत में चीनी के आयात पर 100% मूल सीमा शुल्क (Basic Customs Duty) लागू होता है। लेकिन इस विशेष छूट योजना के तहत आयात शुल्क को पूरी तरह से शून्य (0%) कर दिया गया है। 

नीचे दी गई तालिका इस नीतिगत बदलाव और वर्तमान बाजार स्थिति के प्रमुख पहलुओं को दर्शाती है:

घटक / पैरामीटर विवरण और प्रमुख आंकड़े बाजार पर प्रभाव एवं विश्लेषण
पुरानी समयसीमा 31 अक्टूबर 2026 त्योहारी सीजन की व्यस्तता के कारण आयातक पूरा कोटा नहीं मंगा पा रहे थे।
नई विस्तारित समयसीमा 31 दिसंबर 2026 आयातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुकूल कीमतों का इंतजार करने के लिए 2 महीने का अतिरिक्त समय मिला है।
कुल स्वीकृत कोटा 10 लाख मीट्रिक टन इस कोटे की मात्रा में कोई वृद्धि नहीं की गई है, जिससे घरेलू उत्पादकों के हितों की भी रक्षा हो सके।
अब तक हुआ वास्तविक आयात लगभग 2.6 लाख टन कुल कोटे का एक बड़ा हिस्सा (लगभग 7.4 लाख टन) अभी भी आयात होना बाकी है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें ऊंची थीं।
वार्षिक घरेलू मांग 280 – 285 लाख टन देश में चीनी की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।
अनुमानित चीनी उत्पादन (2025-26) 306 लाख टन (पहले के 343 लाख टन के अनुमान से कम) उत्पादन अनुमान में गिरावट ही सरकार द्वारा लगभग एक दशक बाद चीनी आयात की अनुमति देने का मुख्य कारण बनी।

  • कम आयात की गति: अगस्त 2026 में छूट मिलने के बावजूद, अब तक केवल 2.6 लाख टन कच्ची चीनी ही आयात की जा सकी थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी के दाम महंगे होने के कारण व्यापारियों को आयात करने में पर्याप्त मुनाफा (Price Parity) नहीं दिख रहा था।

  • घरेलू कीमतों को नियंत्रित करना: त्योहारों (जैसे दिवाली) के दौरान चीनी की खुदरा कीमतें ₹60 से ₹65 प्रति किलो तक पहुंच गई थीं। आयात विकल्प खुला रखकर सरकार सट्टेबाजी और जमाखोरी को रोकना चाहती है।

  • कम उत्पादन का जोखिम: चालू विपणन वर्ष के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान घटकर 306 लाख टन रह गया है। हालांकि यह घरेलू मांग (280-285 लाख टन) से अधिक है, फिर भी बफर स्टॉक बनाए रखने और भविष्य की अनिश्चितता से निपटने के लिए यह विस्तार जरूरी था।

📈 अर्थव्यवस्था और बाजार पर प्रभाव

  • रिफाइनरियों को राहत: भारत की तटीय चीनी रिफाइनरियों को इस फैसले से सबसे ज्यादा फायदा होगा, क्योंकि वे कच्चे माल के रूप में शुल्क-मुक्त कच्ची चीनी का आयात कर उसे प्रोसेस कर सकती हैं।

  • कड़े नियम लागू: सरकार ने आयातित चीनी की जमाखोरी रोकने के लिए नियम भी कड़े किए हैं, जिसके तहत TRQ के तहत आयातित कच्ची चीनी को 2 महीने के भीतर रिफाइंड करके घरेलू बाजार में बेचना अनिवार्य है। 

  • उपभोक्ताओं को लाभ: बाजार में अतिरिक्त चीनी की उपलब्धता की संभावना से कीमतों में ₹300 से ₹500 प्रति क्विंटल तक की नरमी देखने को मिल सकती है, जिससे आम जनता को महंगाई से राहत मिलेगी।

You may have missed

Share