October 26, 2026

हरिद्वार अर्धकुंभ पर गंगा घाटों पर AI कैमरों की तीसरी आंख से  होगी निगरानी, सुरक्षा के दृष्टिगत सरकार ने  तैयार की ₹82 लाख की योजना,,,,

हरिद्वार अर्धकुंभ पर गंगा घाटों पर AI कैमरों की तीसरी आंख से  होगी निगरानी, सुरक्षा के दृष्टिगत सरकार ने  तैयार की ₹82 लाख की योजना,,,,

​हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में आगामी अर्धकुंभ के दौरान गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की पुख्ता सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए हाईटेक व्यवस्था की जा रही है। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) ने गंगा घाटों पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित आधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाने की कार्ययोजना तैयार की है। इस पूरी परियोजना की अनुमानित लागत 82.13 लाख रुपये निर्धारित की गई है।

​ये कैमरे सामान्य वीडियो रिकॉर्डिंग से आगे बढ़कर आधुनिक एआई एनालिटिक्स से लैस होंगे। इनमें फेशियल रिकग्निशन (चेहरे की पहचान), वाहन और व्यक्ति ट्रैकिंग, प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध प्रवेश (इंट्रूज़न डिटेक्शन) और सुरक्षा सीमा रेखा पार करने पर अलर्ट जारी करने जैसी उन्नत सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा, कैमरों के जरिए घाटों पर भीड़ के घनत्व, कतारों की लंबाई और अत्यधिक दबाव वाले संवेदनशील हिस्सों का रियल-टाइम आकलन भी किया जा सकेगा।

​🟢 चुनौतियों से निपटेगा तकनीकी सुरक्षा तंत्र

पर्वों और शाही स्नान के दौरान घाटों पर उमड़ने वाली भारी भीड़ के बीच सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। गंगा के किनारों पर फिसलन, तेज बहाव, गहरे पानी में जाने का जोखिम और अत्यधिक भीड़ के कारण भगदड़ या बिछड़ने जैसी घटनाएं सामने आती हैं। एआई कैमरों से मिलने वाले इनपुट की मदद से कंट्रोल रूम में तैनात निगरानी दल स्थिति का तुरंत विश्लेषण कर सकेगा और आवश्यकता पड़ने पर त्वरित राहत दल (क्यूआरटी) को मौके पर भेज सकेगा।

​🟢 दो श्रेणियों के उन्नत कैमरे होंगे तैनात

सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए घाटों पर दो विशेष प्रकार के कैमरे स्थापित किए जाएंगे:

  • ​आउटडोर बुलेट कैमरे: ये कैमरे मौसम प्रतिरोधी (धूल और पानी से सुरक्षित) होंगे। इनमें रात के अंधेरे में निगरानी के लिए 50 से 80 मीटर की इन्फ्रारेड (IR) रेंज, मोटराइज्ड लेंस और स्थानीय स्टोरेज के लिए मेमोरी कार्ड की सुविधा होगी।
  • ​पीटीजेड (पैन-टिल्ट-जूम) कैमरे: 360 डिग्री घूमने की क्षमता वाले इन कैमरों में 33 गुना (33x) ऑप्टिकल जूम और 200 मीटर तक की नाइट विजन इन्फ्रारेड क्षमता होगी। इससे दूरदराज के संवेदनशील क्षेत्रों और घाट के गहरे जल स्तर पर भी रात के समय स्पष्ट नजर रखी जा सकेगी।

​इस एआई-संचालित निगरानी नेटवर्क के क्रियान्वयन से अर्धकुंभ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा, यातायात नियंत्रण और आपातकालीन प्रबंधन को एक प्रभावी और त्वरित ढांचा मिलेगा।

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