उत्तरप्रदेश मेरठ के सिवाया गांव में सांप्रदायिक सौहार्द्र की बड़ी मिसाल, हजारों शिव भक्तों ने हाईवे रोककर दिया जनाजे को रास्ता,,,,

मेरठ। दिल्ली-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग पर रविवार को सिवाया गांव के पास इंसानियत और साम्प्रदायिक सौहार्द का एक अत्यंत दुर्लभ व प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला। हृदय गति रुकने (हार्ट अटैक) से असमय काल के गाल में समाए 40 वर्षीय निजाम के अंतिम संस्कार के लिए कांवड़ियों ने स्वतःस्फूर्त रूप से आगे बढ़कर हाईवे पर उमड़े हजारों शिवभक्तों के जनसैलाब को रोक लिया और जनाजे के लिए सुरक्षित मार्ग प्रशस्त किया।
हाईवे के दूसरी ओर था कब्रिस्तान
प्राप्त विवरण के अनुसार, सिवाया गांव निवासी निजाम (40) का रविवार को अचानक दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। परिजनों ने जब उनके पार्थिव शरीर को सुपुर्द-ए-खाक करने के लिए कब्रिस्तान ले जाने की तैयारी की, तो उनके समक्ष एक बड़ी व्यावहारिक चुनौती खड़ी हो गई। कांवड़ यात्रा के अपने अंतिम चरण पर होने के कारण इस समय दिल्ली-दून हाईवे पर हर मिनट हजारों की संख्या में कांवड़िए गुजर रहे थे, जबकि मृतक का कब्रिस्तान हाईवे के ठीक दूसरी तरफ स्थित था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने स्थानीय पुलिस प्रशासन से सहायता का आग्रह किया।
पुलिस की मौजूदगी में कांवड़ियों ने संभाली कमान
सूचना मिलते ही दौराला थाना प्रभारी सुमन कुमार सिंह पुलिस बल के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे। पुलिस की उपस्थिति में जैसे ही जनाजा हाईवे के समीप पहुंचा, वहां से गुजर रहे कांवड़ियों की नजर उस पर पड़ी। स्थिति की नजाकत को भांपते हुए कुछ संवेदनशील कांवड़िए खुद आगे आए और उन्होंने अन्य शिवभक्तों को रोककर हाईवे के यातायात को नियंत्रित करना शुरू कर दिया।
चेन बनाकर रोका यातायात, गूंजे ‘हर-हर महादेव’ के नारे

देखते ही देखते कांवड़ियों ने एक-दूसरे का हाथ थामकर हाईवे पर मानव श्रृंखला (चेन) बना ली। जब तक निजाम का जनाजा पूरी गरिमा और सम्मान के साथ हाईवे पार कर कब्रिस्तान तक नहीं पहुंच गया, तब तक हजारों की संख्या में मौजूद कांवड़िए पूरी तरह अनुशासित और शांत मुद्रा में वहीं डटे रहे। जनाजा सकुशल निकल जाने के उपरांत, कांवड़ियों ने ‘हर-हर महादेव’ का उद्घोष करते हुए अपनी यात्रा पुनः आगे बढ़ाई।
क्षेत्र में हो रही मुक्तकंठ से प्रशंसा
शिवभक्तों के इस अनुकरणीय और मानवीय व्यवहार की पूरे मेरठ क्षेत्र में व्यापक सराहना हो रही है। स्थानीय प्रबुद्धजनों का मानना है कि इस पहल ने एक बार फिर देश की साझी संस्कृति यानी ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ की नींव को मजबूत किया है, जो समाज के लिए आपसी सौहार्द का एक अनूठा संदेश है।

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