August 26, 2026

उत्तराखंड आपदा के जख्मों पर साहस का मरहम, तबाही के 6 महीने बाद फिर गुलजार हुआ सहस्त्रधारा देहरादून,,,,,

उत्तराखंड आपदा के जख्मों पर साहस का मरहम, तबाही के 6 महीने बाद फिर गुलजार हुआ सहस्त्रधारा देहरादून,,,,,

देहरादून: प्रकृति के रौद्र रूप और तबाही के मंजर को पीछे छोड़ते हुए देहरादून का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल ‘सहस्त्रधारा’ एक बार फिर पर्यटकों की चहल-पहल से चहक उठा है। सितंबर 2025 की उस काली रात ने यहाँ के व्यापारियों का सबकुछ छीन लिया था, लेकिन आज यहाँ की रौनक स्थानीय लोगों के अदम्य साहस और जिजीविषा की गवाही दे रही है।

🔴 खौफनाक यादें और पुनर्निर्माण की चुनौती

​सितंबर 2025 में आई भीषण बाढ़ ने सहस्त्रधारा के भूगोल को बदल कर रख दिया था। जलस्तर में अचानक हुई वृद्धि ने दुकानों और आशियानों को तिनके की तरह बहा दिया था। कई परिवारों ने अपनों को खोया और कइयों का वर्षों का कारोबार पल भर में जमींदोज हो गया। आज, करीब छह महीने बाद जब पर्यटन सीजन की शुरुआत हुई है, तो यहाँ के व्यापारी अपनी टूटी हुई उम्मीदों को समेटकर दोबारा मैदान में उतर आए हैं।

🟢 मजबूरी और हिम्मत का संगम

​स्थानीय व्यापारियों के लिए यह केवल व्यापार का सवाल नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई है। व्यापारी राजेंद्र प्रसाद कोठारी, जिन्होंने अपने 50 साल के जीवन में ऐसी आपदा कभी नहीं देखी थी, बताते हैं, “लोग कहते हैं कि हम फिर से नदी किनारे दुकान लगा रहे हैं, लेकिन हमारे पास परिवार पालने के लिए इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।”

​इसी तरह व्यापारी रघुवीर का दर्द भी कम नहीं है। आपदा में उनका करीब 12 लाख रुपये का नुकसान हुआ, दुकान के साथ सारा सामान बह गया। लेकिन मार्च से उन्होंने फिर से शून्य से शुरुआत की है। अब पर्यटकों की बढ़ती संख्या उनके चेहरों पर मुस्कान और भविष्य के प्रति एक नई उम्मीद लेकर आ रही है।

🔴 सतर्कता के साये में कारोबार

​भले ही कारोबार पटरी पर लौट रहा है, लेकिन ‘कयामत की उस रात’ का खौफ आज भी व्यापारियों के दिलों में घर किए हुए है। अब यहाँ के दुकानदार मौसम को लेकर बेहद सतर्क रहते हैं। आसमान में काले बादल छाते ही धड़कनें बढ़ जाती हैं। व्यापारियों का कहना है कि अब वे किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए हर वक्त तैयार रहते हैं और बारिश शुरू होते ही सामान समेटकर सुरक्षित स्थानों की ओर रुख करने की योजना उनके पास रहती है।

🟢 उम्मीद की नई किरण

​सरकार और विभिन्न सामाजिक संगठनों की मदद से बाजार को दोबारा विकसित किया गया है। व्यापारियों को उम्मीद है कि आने वाले समय में पर्यटकों की संख्या और बढ़ेगी, जिससे उनका आर्थिक ढांचा दोबारा मजबूत हो सकेगा। सहस्त्रधारा का यह पुनर्जन्म केवल उत्तराखंड के पर्यटन के लिए ही नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के लिए एक मिसाल है जो आपदा के बाद हार मानने के बजाय फिर से खड़े होने का हौसला रखते हैं।

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