October 26, 2026

उत्तराखंड काठगोदाम-नैनीताल मार्ग के चौड़ीकरण को मिली गति, ₹600 करोड़ से सुगम होगा पहाड़ों का सफर,,,,

उत्तराखंड काठगोदाम-नैनीताल मार्ग के चौड़ीकरण को मिली गति, ₹600 करोड़ से सुगम होगा पहाड़ों का सफर,,,,

​नैनीताल/हल्द्वानी। उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में पर्यटन को नई गति देने और वर्ष भर लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए काठगोदाम से नैनीताल (रूसी बैंड) तक सड़क चौड़ीकरण परियोजना पर काम तेजी से शुरू हो गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग-109 (NH-109) के इस मुख्य हिस्से को फोर-लेन और टू-लेन विद पेव्ड शोल्डर के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस पूरी परियोजना की लागत ₹600 करोड़ से अधिक आंकी गई है, जिसके लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से मंजूरी मिल चुकी है।

​12 मीटर तक चौड़ी होगी सड़क, यात्रा का समय आधा होगा

काठगोदाम से रूसी बैंड तक लगभग 26 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को वर्तमान चौड़ाई से बढ़ाकर 12 मीटर तक चौड़ा किया जाना प्रस्तावित है। इसमें 10 मीटर का डामरीकृत मार्ग और दोनों ओर 1-1 मीटर के पेव्ड शोल्डर शामिल होंगे। वर्तमान में काठगोदाम से नैनीताल पहुंचने में लगने वाला ढाई घंटे का समय सड़क बनने के बाद घटकर महज 1 घंटा 20 मिनट रह जाएगा। इससे न केवल पर्यटकों बल्कि आपातकालीन सेवाओं और स्थानीय निवासियों को भी बड़ी राहत मिलेगी।

​10 गांवों की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया अंतिम चरण में

परियोजना के लिए काठगोदाम, रानीबाग, मोरा दोगड़ा, डोलमार, ज्योली, चोपड़ा, बल्यूटी, ज्योलीकोट और बेलुवाखान समेत 10 गांवों की लगभग 8.32 हेक्टेयर निजी व सरकारी भूमि का चयन किया गया है। प्रभावित भूमि स्वामियों के लिए लगभग ₹33.72 करोड़ के मुआवजे का प्रावधान किया गया है, जिसके वितरण की प्रक्रिया तेजी से जारी है।

​पर्यावरण और वन भूमि हस्तांतरण पर कदम

सड़क चौड़ीकरण की जद में नैनीताल वन प्रभाग के लगभग 17,400 पेड़ आ रहे हैं। क्षतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) के तहत जिला प्रशासन द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को 6 हेक्टेयर वैकल्पिक भूमि पहले ही सौंपी जा चुकी है। पेड़ों के कटान और वन भूमि हस्तांतरण के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से अंतिम चरण की स्वीकृतियां ली जा रही हैं।

​बाईपास से रानीबाग में भी जाम से मिलेगी मुक्ति

काठगोदाम और रानीबाग के संकरे रास्तों पर लगने वाले भीषण जाम से निपटने के लिए गौलापार-रानीबाग के बीच 3.5 किलोमीटर लंबे बाईपास का निर्माण भी इस योजना का हिस्सा है। इस बाईपास के बनने से भारी वाहन और नैनीताल जाने वाला मुख्य ट्रैफिक शहर के अंदरूनी हिस्सों में प्रवेश किए बिना सीधे मार्ग पर निकल सकेगा, जिससे काठगोदाम और हल्द्वानी में यातायात सुचारू रहेगा।

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