उत्तराखंड के नैनीताल में उभर रहा ‘विलेज टूरिज्म’ मॉडल, गांव बन रहे सैलानियों की पहली पसंद, पलायन पर लगेगा कुछ हद तक विराम,,,,

नैनीताल। उत्तराखंड की सरोवर नगरी नैनीताल अब पारंपरिक पर्यटन सीमाओं से आगे बढ़कर एक नई पहचान गढ़ रही है। जहां कभी यह शहर केवल मॉल रोड और नैनी झील तक सीमित माना जाता था, वहीं अब इसके आसपास के शांत और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर गांव भी तेजी से पर्यटन के नक्शे पर उभर रहे हैं। ‘विलेज टूरिज्म’ के इस नए ट्रेंड ने न सिर्फ सैलानियों को आकर्षित किया है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं।
पर्यटन के इस बदलते स्वरूप में पर्यटक अब भीड़भाड़ से दूर प्राकृतिक वातावरण में समय बिताना पसंद कर रहे हैं। गांवों में विकसित हो रहे होमस्टे, पारंपरिक पहाड़ी भोजन, लोक संस्कृति और सादगी भरी जीवनशैली सैलानियों को एक अनोखा और यादगार अनुभव प्रदान कर रही है। यही कारण है कि अब पर्यटक होटलों की बजाय गांवों में ठहरने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
रोजगार के नए अवसर, पलायन पर लगाम 
विलेज टूरिज्म के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। जहां पहले रोजगार के सीमित साधन थे, वहीं अब होमस्टे संचालन, स्थानीय गाइडिंग, हस्तशिल्प और लोक कला के जरिए आय के नए स्रोत विकसित हो रहे हैं। इस पहल से पलायन जैसी गंभीर समस्या पर भी नियंत्रण की उम्मीद जगी है।
जिला पर्यटन अधिकारी अतुल भंडारी के अनुसार, विभाग ऐसे गांवों की पहचान कर रहा है जहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। इसी क्रम में प्यूड़ा गांव को ‘नोमेडिक विलेज’ के रूप में विकसित किया गया है। यहां आधुनिक सुविधाओं से युक्त होमस्टे, वर्क स्टेशन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किए गए हैं, जिससे पर्यटक प्राकृतिक वातावरण के बीच रहकर भी अपने कार्यों को सहजता से कर सकते हैं।
प्यूड़ा बना आदर्श मॉडल 
नैनीताल जिले का प्यूड़ा गांव आज विलेज टूरिज्म का एक सफल उदाहरण बनकर सामने आया है। यहां पर्यटक न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेते हैं, बल्कि स्थानीय जीवनशैली का हिस्सा बनते हुए खेतों में काम करना, पारंपरिक व्यंजन बनाना और लोक संस्कृति में भागीदारी जैसे अनुभव भी प्राप्त करते हैं।
पर्यटन विभाग इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। होमस्टे निर्माण के लिए सब्सिडी दी जा रही है, जिससे ग्रामीणों को आर्थिक सहायता मिल रही है। वर्तमान में नैनीताल जिले में लगभग 170 से 180 होमस्टे संचालित हो रहे हैं, जो इस बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाते हैं।
कैसे जुड़ सकते हैं गांव 
यदि कोई गांव विलेज टूरिज्म से जुड़ना चाहता है, तो उसे पर्यटन विभाग को प्रस्ताव प्रस्तुत करना होता है। प्रस्ताव में गांव की विशेषताओं, प्राकृतिक संसाधनों और उपलब्ध सुविधाओं का विवरण दिया जाता है। इसके बाद विभाग द्वारा निरीक्षण और विचार-विमर्श के आधार पर निर्णय लिया जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, विलेज टूरिज्म एक संतुलित और टिकाऊ विकास मॉडल है, जो शहरों पर बढ़ते दबाव को कम करने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों को समान अवसर प्रदान करता है। हालांकि, इसके सफल क्रियान्वयन के लिए पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक संतुलन बनाए रखना भी बेहद आवश्यक है।

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