October 22, 2026

उत्तराखंड चंपावत के ऐतिहासिक राजबुंगा किले का होगा कायाकल्प, ₹4.91 करोड़ से संवरेगा 800 साल पुरानी धरोहर बनेगी एक और प्रमुख पर्यटन केंद्र,,,

उत्तराखंड चंपावत के ऐतिहासिक राजबुंगा किले का होगा कायाकल्प, ₹4.91 करोड़ से संवरेगा 800 साल पुरानी धरोहर बनेगी एक और प्रमुख पर्यटन केंद्र,,,

​चंपावत। उत्तराखंड सरकार राज्य की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर चंपावत स्थित लगभग 800 वर्ष पुराने ऐतिहासिक राजबुंगा किले के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर कुल 4 करोड़ 91 लाख 30 हजार 305 रुपये की लागत आएगी।

​🟢 मूल स्वरूप रहेगा सुरक्षित, जुड़ेंगी आधुनिक सुविधाएं

चंद राजवंश के संस्थापक राजा सोमचंद द्वारा निर्मित इस प्राचीन किले के पुनरुद्धार के दौरान इसके मूल वास्तुशिल्प और ऐतिहासिक स्वरूप को अक्षुण्ण रखा जाएगा। योजना का मुख्य उद्देश्य किले के प्राचीन वैभव को संरक्षित करते हुए पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाओं का विकास करना है, जिससे कुमाऊं की ऐतिहासिक पहचान को राष्ट्रीय पटल पर नई पहचान मिल सके।

​🟢 परिसर में विकसित होंगे संग्रहालय और एम्फीथिएटर

सौंदर्यीकरण योजना के अंतर्गत किले के भीतर कई प्रमुख आकर्षण जोड़े जाएंगे:

  • ​पुरातात्विक संग्रहालय व आर्ट गैलरी: चंपावत और कुमाऊं के गौरवशाली इतिहास को दर्शाने के लिए विशेष दीर्घाओं का निर्माण होगा।
  • ​ओपन-एयर एम्फीथिएटर: सांस्कृतिक गतिविधियों और आयोजनों के लिए खुला रंगमंच तैयार किया जाएगा।
  • ​पर्यटक सुविधाएं: कैफेटेरिया, आधुनिक टिकट काउंटर, सार्वजनिक प्रसाधन, आकर्षक लैंडस्केपिंग और पैदल भ्रमण के लिए सुव्यवस्थित वॉकवे विकसित किए जाएंगे।

​🟢 गुणवत्ता और समयसीमा पर विशेष जोर

जिलाधिकारी मनीष कुमार ने कार्यदायी संस्था और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी निर्माण एवं पुनरुद्धार कार्यों में गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए और परियोजना को तय समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए।

​🟢 स्थानीय आर्थिकी और रोजगार को मिलेगा संबल

राजबुंगा किले के एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने से जिले में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर होमस्टे, गाइड, हस्तशिल्प और खानपान से जुड़े युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा होंगे, बल्कि चंपावत की समग्र अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

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