August 25, 2026

उत्तराखंड दिल्ली से चारधाम यात्रा होगी बेहद आसान, रैपिड रेल और कर्णप्रयाग रेल लाइन से बचेंगे 7 घंटे, 2029 तक पूरा होगा प्रोजेक्ट,,,,

उत्तराखंड दिल्ली से चारधाम यात्रा होगी बेहद आसान, रैपिड रेल और कर्णप्रयाग रेल लाइन से बचेंगे 7 घंटे, 2029 तक पूरा होगा प्रोजेक्ट,,,,

देहरादून। दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश से हर महीने उत्तराखंड आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए आने वाला समय बड़ी सौगात लेकर आ रहा है। दो बेहद महत्वाकांक्षी परियोजनाओं—दिल्ली-मेरठ-ऋषिकेश नमो भारत (रैपिड रेल) कॉरिडोर और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन—के धरातल पर उतरने के बाद चारधाम यात्रा की तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है। इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने से दिल्ली से कर्णप्रयाग तक का सफर जो अभी 11 से 13 घंटे में तय होता है, वह घटकर मात्र 5 से 6 घंटे रह जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं के करीब 7 घंटे बचेंगे।

🟢 मेरठ से ऋषिकेश तक दौड़ेगी ‘नमो भारत’

​उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच कनेक्टिविटी को रफ्तार देने के लिए मेरठ से मुजफ्फरनगर होते हुए हरिद्वार-ऋषिकेश तक नमो भारत ट्रेन चलाने के प्लान पर मुहर लग गई है। यह कॉरिडोर मोदीपुरम (मेरठ) से लक्ष्मण झूला (ऋषिकेश) तक बनेगा। इस 150 किलोमीटर लंबे रूट पर रैपिड रेल 160 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर (नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद) के यात्री भारी ट्रैफिक वाले सड़क रास्तों से बचकर सीधे और तेजी से ऋषिकेश पहुंच सकेंगे।

🟢 ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन: पहाड़ों में साकार होगा रेल का सपना

​ऋषिकेश से कर्णप्रयाग के बीच बन रही यह रेल लाइन भारतीय रेलवे का एक ऐतिहासिक और चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शिलान्यास किए गए इस प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • लंबाई और रूट: यह प्रोजेक्ट लगभग 125 किलोमीटर लंबा है। रेल मार्ग बनने से ऋषिकेश से कर्णप्रयाग की दूरी सड़क मार्ग (173 किमी) के मुकाबले करीब 48 किलोमीटर कम हो जाएगी।
  • सुरंग और पुल: इस रूट का 85% हिस्सा (लगभग 105 किलोमीटर) सुरंगों और पुलों से होकर गुजरेगी। पूरे प्रोजेक्ट में 16 सुरंगें और 35 पुल शामिल हैं।
  • सबसे बड़ी सुरंग: देवप्रयाग से जनासू के बीच बन रही सुरंग इस रूट की सबसे बड़ी सुरंग है, जिसकी लंबाई 14.58 किलोमीटर है, जबकि सबसे छोटी सुरंग 200 मीटर की है।
  • स्टेशन: इस पूरे रूट पर कुल 12 रेलवे स्टेशन बनाए जा रहे हैं।

🟢 टाइमलाइन और वर्तमान स्थिति

​परियोजना के डिप्टी जनरल मैनेजर ओपी मालगुडी के अनुसार, इस प्रोजेक्ट का 75 फीसदी काम पूरा हो चुका है और यह 2029 तक पूरी तरह तैयार हो जाएगा। पर्यावरण मानकों का ध्यान रखते हुए टनल बोरिंग मशीन (TBM) से काम किया जा रहा है। सुरंगों के भीतर दोहरी रेल लाइन, आधुनिक जल निकासी, वेंटिलेशन और आपातकालीन रास्तों की व्यवस्था की गई है। इस महत्वाकांक्षी रेल लाइन का पहला ट्रायल जून 2028 में ऋषिकेश के शिवपुरी से ब्यासी के बीच किया जाएगा।

🟢 परियोजनाओं के सामरिक और आर्थिक लाभ

  • पर्यटन व तीर्थाटन को बढ़ावा: इस रेल लाइन के शुरू होने से केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम की यात्रा सुगम हो जाएगी और उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन का तेजी से विकास होगा।
  • सैन्य साजोसामान में आसानी: सामरिक दृष्टिकोण से यह रेल लाइन बेहद महत्वपूर्ण है। इससे भारत-तिब्बत-चीन सीमा पर तैनात सैनिकों तक रसद, सैन्य साजोसामान और हथियार तेजी से पहुंचाना संभव होगा, जिससे देश की सीमाएं अधिक मजबूत होंगी।
  • इतिहास में नया अध्याय: उत्तराखंड में अब तक अंग्रेजों के समय विकसित की गई लाइनें (देहरादून, ऋषिकेश, कोटद्वार, रामनगर और काठगोदाम) ही अंतिम छोर के स्टेशन थीं, लेकिन अब पहली बार रेल पहाड़ों को चीरते हुए उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में प्रवेश कर रही है।

🟢 यात्रा का नया संभावित समय (सड़क बनाम रेल मार्ग)

रूट

वर्तमान समय (सड़क मार्ग)

संभावित समय (नमो भारत व रेल मार्ग)

दिल्ली NCR से ऋषिकेश

5 से 6 घंटे

2.5 से 3 घंटे

ऋषिकेश से कर्णप्रयाग

5 से 6 घंटे

2 से 2.5 घंटे

कुल यात्रा (दिल्ली से कर्णप्रयाग)

11 से 13 घंटे

5

🟢 आगे का सफर- कर्णप्रयाग से केदारनाथ धाम

​कर्णप्रयाग स्टेशन पहुंचने के बाद तीर्थयात्रियों के लिए केदारनाथ का सफर सड़क और पैदल मार्ग से पूरा होगा:

  • कर्णप्रयाग से गौरीकुंड (बेस कैंप): यह दूरी लगभग 105 किलोमीटर है, जिसे कार या बस के जरिए तय करने में 3.5 से 4 घंटे का समय लगता है।
  • गौरीकुंड से केदारनाथ मंदिर: बेस कैंप से मुख्य मंदिर तक 16 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई है, जिसे पैदल या घोड़े-खच्चर से तय करने में 6 से 8 घंटे लगते हैं। इसके अलावा हेलीकॉप्टर सेवा का विकल्प भी उपलब्ध रहता है।

🟢 श्रद्धालुओं के लिए विशेष: केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में दर्शन व आरती का समय

🏵 केदारनाथ धाम:

  • विशेष पूजा व महाअभिषेक: सुबह 04:00 बजे से 06:00 बजे तक
  • सामान्य दर्शन: सुबह 06:00 बजे से दोपहर 03:00 बजे तक
  • कपाट बंद (विश्राम): दोपहर 03:00 बजे से शाम 05:00 बजे तक
  • शाम के दर्शन: शाम 05:00 बजे से रात 09:00 बजे तक
  • शृंगार आरती: शाम लगभग 07:30 बजे
  • शयन आरती व कपाट बंदी: रात 08:30 बजे आरती और रात 09:00 बजे कपाट बंद।

🏵 बद्रीनाथ धाम:

  • महाअभिषेक व मंगला आरती: सुबह 04:30 बजे से
  • सामान्य दर्शन: सुबह 07:00 बजे से दोपहर 01:00 बजे तक
  • कपाट बंद (भोग व विश्राम): दोपहर 01:00 बजे से शाम 04:00 बजे तक
  • शाम के दर्शन: शाम 04:00 बजे से रात 09:00 बजे तक
  • शाम की आरती: शाम 06:00 बजे से 07:00 बजे के बीच
  • शयन आरती व मंदिर बंदी: रात 08:30 बजे आरती और रात 09:00 बजे मंदिर के कपाट बंद।
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