November 1, 2026

​उत्तराखंड दून अस्पताल में नवजात की मौत पर परिजनों ने  किया हंगामा, प्रबंधन ने बैठाई जांच,,,

​उत्तराखंड दून अस्पताल में नवजात की मौत पर परिजनों ने  किया हंगामा, प्रबंधन ने बैठाई जांच,,,

​देहरादून। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में शनिवार सुबह एक नवजात शिशु की मौत के बाद परिजनों ने स्वास्थ्यकर्मियों और चिकित्सकों पर घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह स्थिति को संभाला, वहीं अस्पताल प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आंतरिक जांच बैठा दी है।

​जानकारी के अनुसार, देहरादून निवासी एक गर्भवती महिला को प्रसव के लिए तीन दिन पूर्व दून अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शनिवार सुबह करीब 10 बजे महिला का प्रसव कराया गया, जिसके तुरंत बाद चिकित्सकों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। इससे आक्रोशित परिजनों ने प्रसव कक्ष के बाहर हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों का आरोप था कि प्रसव के दौरान डॉक्टरों ने स्थिति को स्पष्ट नहीं किया और नवजात के जन्म के बाद एक कर्मचारी ने उनसे बधाई स्वरूप मिठाई लाने को कहा, लेकिन कुछ देर बाद बच्चे की मौत की बात कह दी गई। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि भर्ती के दौरान जरूरी अल्ट्रासाउंड तक नहीं कराया गया।

​उधर, दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रविंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि प्रारंभिक जांच के अनुसार नवजात के गले में गर्भनाल लिपटी हुई थी, जिससे जन्म के समय वह गंभीर स्थिति में था और सांस नहीं ले सका। उन्होंने कहा कि परिजनों के आरोपों की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए गए हैं और यदि किसी भी स्तर पर स्टाफ की लापरवाही सामने आती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

​सहसपुर सीएचसी: बिना सर्जन के निश्चेतक की तैनाती, अब वह भी चले गए छुट्टी पर

​विकासनगर। विकासनगर क्षेत्र अंतर्गत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) सहसपुर में स्वास्थ्य सेवाओं की विसंगति का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल में लंबे समय से सर्जन का पद रिक्त चल रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने वहां केवल निश्चेतक (एनेस्थेटिस्ट) की तैनाती कर दी। विडंबना यह है कि तैनात निश्चेतक भी अब आगे की उच्च शिक्षा के लिए लंबी छुट्टी पर चले गए हैं।

​राष्ट्रीय राजमार्ग और अन्य प्रमुख मार्गों से सटे होने के कारण सहसपुर अस्पताल में सड़क दुर्घटनाओं के घायलों और गंभीर मरीजों की संख्या काफी अधिक रहती है। अस्पताल में सिजेरियन प्रसव और आपातकालीन ऑपरेशनों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए सर्जन और निश्चेतक दोनों का होना अनिवार्य है। सर्जन न होने से पहले ही ऑपरेशन की सुविधा बंद पड़ी थी, और अब निश्चेतक के भी अध्ययन अवकाश पर जाने से स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है।

​नतीजतन, आपातकालीन मामलों और गर्भवती महिलाओं को सिजेरियन प्रसव के लिए निजी अस्पतालों या देहरादून के उच्च चिकित्सा केंद्रों पर रेफर किया जा रहा है। इससे क्षेत्र के करीब एक लाख से अधिक आबादी को उपचार के लिए भारी परेशानियों और आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ रहा है।

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