September 16, 2026

उत्तराखंड नंदा गौरा योजना में बड़े घोटाले का हुआ पर्दाफाश, दो सौ अपात्रों को दिए 1 करोड़ से अधिक रुपये, तत्कालीन तीन CDOP पर कार्रवाई की तलवार,,,

उत्तराखंड नंदा गौरा योजना में बड़े घोटाले का हुआ पर्दाफाश, दो सौ अपात्रों को दिए 1 करोड़ से अधिक रुपये, तत्कालीन तीन CDOP पर कार्रवाई की तलवार,,,

हरिद्वार। उत्तराखंड की बहुचर्चित ‘नंदा गौरा योजना’ में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता और घोटाले का मामला सामने आया है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वित्तीय वर्ष 2020-21 और 2021-22 के दौरान लगभग दो सौ अपात्र लाभार्थियों को एक करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी धनराशि प्रोत्साहन के रूप में गलत तरीके से बांट दी गई। इस गंभीर मामले के सामने आने के बाद अब तीन बाल विकास परियोजना अधिकारियों (सीडीपीओ) पर विभागीय कार्रवाई की तलवार लटक गई है।

🔴 आइए जानते है आखिर क्या है पूरा मामला?

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​हरिद्वार जिले में कैग (CAG) की टीम द्वारा जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय के ऑडिट के दौरान यह वित्तीय अनियमितताएं पकड़ में आईं। जांच में पाया गया कि इंटर उत्तीर्ण करने वाली बालिकाओं को दी जाने वाली 51-51 हजार रुपये की नंदा गौरा योजना की प्रोत्साहन राशि में भारी फेरबदल किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों वित्तीय वर्षों में करीब दो सौ ऐसे लोगों को योजना का लाभ दे दिया गया जो इसके दायरे में ही नहीं आते थे। इस प्रकार प्रशासनिक लापरवाही के चलते एक करोड़ दो लाख रुपये के शासकीय धन का बंदरबांट कर दिया गया।

🔴 कैग की रिपोर्ट और निदेशालय स्तर पर जांच

​कैग की ओर से इस पूरे मामले की रिपोर्ट विभागीय सचिव को भेजी गई थी। सचिव के निर्देश पर निदेशालय द्वारा जिला कार्यक्रम अधिकारी से अपात्र पाए गए लाभार्थियों की सूची की विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी गई। जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय द्वारा परियोजनावार रिपोर्ट तैयार कर निदेशक को भेज दी गई है।

​वर्तमान में निदेशालय स्तर पर गठित कमेटी इस मामले की विस्तार से अंतिम जांच कर रही है। रिपोर्ट पूरी तरह स्पष्ट होने के बाद दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर औपचारिक कार्रवाई की जाएगी।

🔴 तीन सीडीपीओ पर होगी कार्रवाई, एक हो चुके हैं रिटायर

​जिला कार्यक्रम अधिकारी, हरिद्वार (अविनाश भदौरिया) के अनुसार, अपात्रों को नंदा गौरा योजना की प्रोत्साहन राशि जारी करने की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। अब शासन स्तर से इस धनराशि की रिकवरी (वसूली) और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्णय लिया जाना है।

​सूत्रों के मुताबिक, इस प्रकरण की जद में आने वाले तीन सीडीपीओ में से एक अधिकारी सेवानिवृत्त (रिटायर) हो चुके हैं, जबकि दूसरे अधिकारी का हरिद्वार से अन्यत्र ट्रांसफर हो चुका है और तीसरे अधिकारी वर्तमान में हरिद्वार में ही तैनात हैं। अंतिम जांच रिपोर्ट के आधार पर इन सभी पर गाज गिरनी तय मानी जा रही है।

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