September 23, 2026

उत्तराखंड बीजेपी में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल, दुष्यंत गौतम को हटाकर राम माधव को सौंपी हाइकमान ने उत्तराखंड की कमान,,,

उत्तराखंड बीजेपी में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल, दुष्यंत गौतम को हटाकर राम माधव को सौंपी हाइकमान ने उत्तराखंड की कमान,,,

देहरादून। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय नेतृत्व ने उत्तराखंड संगठन में एक बड़ा और अहम बदलाव किया है। पार्टी ने मौजूदा प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम को उनके पद से हटा दिया है। उनकी जगह वरिष्ठ राष्ट्रीय नेता और कुशल रणनीतिकार राम माधव को उत्तराखंड बीजेपी का नया प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया गया है। इस बदलाव को राजनीतिक गलियारों में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

🟢 सह प्रभारी पद पर भी बदलाव, बांसुरी स्वराज को मिली जिम्मेदारी

​संगठन में फेरबदल करते हुए केवल मुख्य प्रभारी ही नहीं, बल्कि सह प्रभारी पद की जिम्मेदारी में भी बदलाव किया गया है। रेखा वर्मा के स्थान पर अब राष्ट्रीय स्तर की नेता बांसुरी स्वराज को उत्तराखंड बीजेपी का नया सह प्रभारी बनाया गया है। वहीं, नए प्रदेश प्रभारी राम माधव को उत्तराखंड के साथ-साथ तमिलनाडु के प्रदेश प्रभारी का अतिरिक्त दायित्व भी सौंपा गया है।

🟢 कौन हैं राम माधव? संघ से लेकर बीजेपी तक का सफर

​वाराणसी राम माधव का जन्म 22 अगस्त 1964 को आंध्र प्रदेश में हुआ था। उन्होंने मैसूर विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की है। बेहद कम उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ने वाले राम माधव साल 1981 में इसके पूर्णकालिक कार्यकर्ता बने थे।

​वह वर्ष 2003 से 2014 तक संघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे। इसके बाद 2014 में उन्हें बीजेपी में प्रतिनियुक्त किया गया, जहाँ उन्होंने 2014 से 2020 तक राष्ट्रीय महासचिव के रूप में अपनी सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों और जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में पार्टी की रणनीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी। वर्तमान में वह पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

🟢 चुनावी समीकरण और राजनीतिक मायने

​उत्तराखंड विधानसभा का कार्यकाल अगले वर्ष यानी 28 मार्च 2027 को समाप्त हो रहा है, जिसके चलते राज्य में फरवरी-मार्च 2027 के दौरान चुनाव होने की संभावना है। चुनाव से ठीक पहले हुए इस फेरबदल के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। जहां एक ओर बीजेपी प्रदेश में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी के लिए अपनी तैयारियों को पुख्ता कर रही है, वहीं इस बदलाव को संगठन को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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