May 13, 2026

उत्तराखंड में मौसम का ‘ऑरेंज अलर्ट’, भारी बारिश, ओलावृष्टि और बर्फबारी की चेतावनी,,,,

उत्तराखंड में मौसम का ‘ऑरेंज अलर्ट’, भारी बारिश, ओलावृष्टि और बर्फबारी की चेतावनी,,,,

देहरादून। उत्तराखंड में मौसम के मिजाज एक बार फिर तल्ख हो गए हैं। राज्य के पर्वतीय जिलों में कुदरत का दोहरा असर देखने को मिल रहा है—एक ओर जहां निचले इलाकों में भारी बारिश और ओलावृष्टि का संकट है, वहीं उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी ने दस्तक दे दी है। मौसम विज्ञान केंद्र ने प्रदेश के कई हिस्सों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए प्रशासन और आम जनता को सतर्क रहने की सलाह दी है।

इन जिलों में दिखेगा सबसे ज्यादा असर

​मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, आगामी 24 घंटों में प्रदेश के पांच प्रमुख पर्वतीय जिलों में मौसम का सबसे उग्र रूप देखने को मिल सकता है:

  • उत्तरकाशी
  • रुद्रप्रयाग
  • चमोली
  • बागेश्वर
  • पिथौरागढ़

​इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश और 40 से 50 किमी/घंटा की रफ्तार से अंधड़ चलने की आशंका है। इसके अलावा, आकाशीय बिजली गिरने और ओलावृष्टि (Hailstorm) की भी प्रबल संभावना जताई गई है।

बर्फबारी और गिरता पारा

​विशेषज्ञों के मुताबिक, 4200 मीटर से अधिक की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मध्यम बर्फबारी हो सकती है। बदरीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब, नीति-माणा और उच्च हिमालयी चोटियों पर बर्फ की सफेद चादर बिछने से तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस शीत लहर का असर देहरादून और ऊधमसिंह नगर जैसे मैदानी क्षेत्रों में भी देखने को मिलेगा, जिससे गर्मी से राहत तो मिलेगी लेकिन जनजीवन प्रभावित हो सकता है।

विशेष- मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेशभर में मौसम का यह मिजाज 18 मई तक जारी रह सकता है।

राजधानी और मैदानी क्षेत्रों का हाल

​पहाड़ों के साथ-साथ मैदानी इलाकों में भी बादल छाए रहेंगे। देहरादून, टिहरी, अल्मोड़ा, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की उम्मीद है।

सुरक्षा एवं बचाव के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश

​मौसम की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने निम्नलिखित सलाह जारी की है:

वर्ग

सुझाव

यात्री/पर्यटक

पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन के खतरे को देखते हुए यात्रा से पहले मौसम अपडेट जरूर लें।

आम नागरिक

बिजली चमकने के दौरान पेड़ों के नीचे या खुले मैदानों में शरण न लें।

किसान

ओलावृष्टि की संभावना को देखते हुए कटी हुई फसलों और बागवानी को सुरक्षित स्थान पर ढक कर रखें।

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