September 2, 2026

उत्तराखंड में हिमनद झीलों पर मंडराता खतरा, सरस्वती और केदार ताल का होगा वैज्ञानिक अध्ययन,,,

उत्तराखंड में हिमनद झीलों पर मंडराता खतरा, सरस्वती और केदार ताल का होगा वैज्ञानिक अध्ययन,,,

​देहरादून: नेपाल आपदा के बाद उत्तराखंड सरकार ने राज्य के संवेदनशील हिमनद (ग्लेशियल) क्षेत्रों को लेकर एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं। इसी क्रम में चमोली जिले की सरस्वती ताल और उत्तरकाशी की केदार ताल का वैज्ञानिक अध्ययन कराया जा रहा है, जिन्हें जोखिम की श्रेणी में शामिल किया गया है।

​अध्ययन के लिए शासन ने विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों के विशेषज्ञों की 15 सदस्यीय टीम का गठन किया है। यह टीम आठ सितंबर को सबसे पहले सरस्वती ताल के लिए रवाना होगी और वहां का आकलन करने के बाद केदार ताल का रुख करेगी। इस वैज्ञानिक सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य झीलों की वर्तमान स्थिति का जायजा लेना, उनके फटने की स्थिति में उत्पन्न होने वाले खतरे का आकलन करना और सुरक्षा के पुख्ता उपायों पर सुझाव देना है।

🟢 अध्ययन टीम के प्रमुख विशेषज्ञ

  • यूएलएमएमसी, देहरादून: डॉ. विशाल और दीपक भट्ट
  • बीएसआइपी, लखनऊ: शेख नवाज अली, शुभजीत घोष और प्रकाश रंजन जेना
  • डब्लूआइएचजी, देहरादून: डॉ. पिंकी बिष्ट, स्वप्निल बिष्ट और शिव्यांक सिंह नेगी
  • एनआइएच, रुड़की: डॉ. शिवानंद महेंद्रा, डॉ. लकुश के. पटेल और शिव शंकर यादव
  • एसडीआरएफ: नरेश खेतवाल और संदीप सिंह
  • नोट: केंद्रीय जल आयोग द्वारा भी जल्द अपना प्रतिनिधि नामित किया जाएगा।

🔴 खतरे की जद में 13 अतिसंवेदनशील झीलें

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने उत्तराखंड में कुल 13 हिमनद झीलों को उच्च जोखिमपूर्ण श्रेणी में रखा है। जिलावार वर्गीकरण के तहत पिथौरागढ़ में 6, चमोली में 4, तथा बागेश्वर, टिहरी और उत्तरकाशी में 1-1 झील शामिल हैं। इससे पहले राज्य स्तर पर चार ग्लोफ (ग्लेशियल लेक आउटब्रर्स्ट फ्लड) संभावित झीलों का सर्वेक्षण किया जा चुका है, जिनमें चमोली की वसुधारा ताल तथा पिथौरागढ़ की मबांग, स्यांतियांकी और प्युनग्रू झीलें शामिल हैं।

🟢 उत्तराखंड में जिलेवार हिमनद झीलों की संख्या

जिला

झीलों की कुल संख्या

चमोली

192

उत्तरकाशी

83

पिथौरागढ़

40

रुद्रप्रयाग

11

टिहरी

10

बागेश्वर

08

आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार, इन वैज्ञानिक अध्ययनों से मिलने वाले निष्कर्षों के आधार पर ही भविष्य की सुरक्षा योजनाओं और आपदा जोखिम न्यूनीकरण उपायों की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

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