October 13, 2026

उत्तराखंड विश्व धरोहर ‘फूलों की घाटी’ के खुले कपाट; पहले दिन 108 पर्यटकों ने किया दीदार,,,,

उत्तराखंड विश्व धरोहर ‘फूलों की घाटी’ के खुले कपाट; पहले दिन 108 पर्यटकों ने किया दीदार,,,,

​गोपेश्वर/चमोली: उत्तराखंड की सुप्रसिद्ध और यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल ‘फूलों की घाटी’ (Valley of Flowers) सोमवार (1 जून) से देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आधिकारिक तौर पर खोल दी गई है। यात्रा के पहले ही दिन उत्साहजनक शुरुआत देखने को मिली, जहां 108 प्रकृति प्रेमियों ने घाटी के मनमोहक और रंग-बिरंगे संसार का दीदार किया।

​🟢 धार्मिक अनुष्ठान के साथ खुला मुख्य गेट

​सुबह ठीक आठ बजे बेस कैंप घांघरिया के समीप वन क्षेत्राधिकारी चेतना कांडपाल, पुलिस चौकी प्रभारी उप निरीक्षक अमनदीप सिंह, स्थानीय नागरिकों और वनकर्मियों की उपस्थिति में विशेष पूजा-अर्चना की गई। भगवान लोकपाल और वन देवताओं का आह्वान करने के पश्चात पर्यटकों के लिए पैदल मार्ग का मुख्य गेट खोला गया।

​पहले दिन दोपहर 12 बजे तक घाटी में प्रवेश करने वाले 108 पर्यटकों में 70 पुरुष, 11 महिलाएं, 24 छात्र-छात्राएं और तीन बच्चे शामिल रहे।

​🟢 फूलों की घाटी- एक नजर में मुख्य बातें

  • ​भौगोलिक स्थिति: चमोली जिले में समुद्रतल से 12,995 फीट की ऊंचाई पर स्थित।
  • ​विस्तार: कुल 87.5 वर्ग किलोमीटर का सुरम्य क्षेत्र।
  • ​यात्रा अवधि: प्रतिवर्ष 1 जून से 31 अक्टूबर तक।
  • ​प्राकृतिक विशेषता: हर 15 दिनों के अंतराल में नए फूलों के खिलने से बदल जाता है घाटी का रंग। यहां 500 से अधिक प्रजाति के फूल पाए जाते हैं।
  • ​वन्य जीव: हिमालयन थार, कस्तूरी मृग, हिम तेंदुआ, काला व भूरा भालू, नीली भेड़ और उड़न गिलहरी का प्राकृतिक आवास।

​🟢 पर्यटकों के लिए जरूरी गाइडलाइंस और नियम

​सुरक्षा और समय सीमा: पर्यटकों को घाटी के भीतर केवल 5 किलोमीटर क्षेत्र तक जाने की अनुमति है। सुबह प्रवेश करने के बाद शाम 5 बजे तक वापस बेस कैंप लौटना अनिवार्य है। घाटी में रात्रि विश्राम (नाईट स्टे) पर पूर्ण प्रतिबंध है।

 

  • ​खाद्य सामग्री: घांघरिया से आगे कोई दुकान न होने के कारण पर्यटकों को भोजन और पानी की व्यवस्था स्वयं करनी होगी।
  • ​पर्यावरण संरक्षण: घाटी से लौटते समय सभी पर्यटकों को अपना प्लास्टिक कचरा अनिवार्य रूप से वापस लाना होगा। घाटी के भीतर किसी भी प्रकार की वनस्पति या फूल को तोड़ना कानूनी रूप से सख्त मना है।
  • ​पंजीकरण: घांघरिया स्थित पंजीकरण केंद्र पर निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद ही प्रवेश की अनुमति दी जा रही है।

​🟢 यात्रा मार्ग- ऐसे पहुंचें फूलों की घाटी

​फूलों की घाटी की यात्रा शुरू करने के लिए पर्यटकों को ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) से होते हुए गोविंदघाट और फिर पुलना गांव पहुंचना होता है।

  1. ​पुलना से घांघरिया: 10 किलोमीटर का पैदल ट्रैक (बेस कैंप)।
  2. ​घांघरिया से फूलों की घाटी: 3 किलोमीटर का मुख्य पैदल सफर।

​🟢 वर्तमान स्थिति

वन क्षेत्राधिकारी चेतना कांडपाल के अनुसार, घाटी के लिए पैदल मार्ग पूरी तरह से सुरक्षित और सुचारू है। पर्यटकों की सुरक्षा और सहायता के लिए जगह-जगह वनकर्मियों की तैनाती की गई है। घाटी को लेकर इस बार देश-विदेश के पर्यटकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

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