August 14, 2026

उत्तराखंड की 4 प्रमुख पर्वतीय सड़कों को मिलेगा NH का दर्जा, केंद्र ने शुरू किया परीक्षण, अब और सुगम हो जाएगी पहाड़ की राह,,,

उत्तराखंड की 4 प्रमुख पर्वतीय सड़कों को मिलेगा NH का दर्जा, केंद्र ने शुरू किया परीक्षण, अब और सुगम हो जाएगी पहाड़ की राह,,,

देहरादून। उत्तराखंड के पर्वतीय और सीमांत क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पहल पर केंद्र सरकार ने सकारात्मक रुख अपनाया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राज्य की चार प्रमुख सड़क परियोजनाओं को राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) नेटवर्क से जोड़ने के प्रस्तावों पर आवश्यक परीक्षण शुरू कर दिया है।

​मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा गत 24 जुलाई को किए गए अनुरोध पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अवगत कराया है कि राज्य सरकार के सभी प्रस्तावों को विस्तृत परीक्षण एवं आगामी कार्यवाही हेतु संबंधित अधिकारियों को प्रेषित कर दिया गया है।

🟢 इन 4 महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को NH नेटवर्क से जोड़ने की मांग

​राज्य सरकार द्वारा केंद्र को भेजे गए प्रस्ताव में चार प्रमुख और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण मार्ग शामिल हैं:

  1. सिकुड़ा बैंड से एनटीडी (अल्मोड़ा): लगभग 1 किलोमीटर लंबे इस मोटर मार्ग को सुरंग निर्माण के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग-309बी का हिस्सा बनाने का प्रस्ताव है।
  2. सेराघाट – बाड़ेछीना मार्ग: 45 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को NH नेटवर्क से जोड़ने का अनुरोध किया गया है।
  3. मरचूला – भिकियासैंण मार्ग: 72 किलोमीटर लंबे इस महत्वपूर्ण पर्वतीय मार्ग को भी राष्ट्रीय राजमार्ग में शामिल करने की मांग है।
  4. कालसी – चकराता मार्ग: 44 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग-707ए और 507 से कनेक्ट करने का प्रस्ताव प्रेषित किया गया है।

🟢 पर्यटन, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई रफ्तार

​केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का आभार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इन मार्गों के राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में शामिल होने से पर्वतीय क्षेत्रों में आवागमन अत्यधिक सुगम हो जाएगा।

​उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार से इन प्रस्तावों पर शीघ्र ही अंतिम मंजूरी मिल जाएगी। इन मार्गों के राष्ट्रीय राजमार्ग बनने से न केवल आम जनता को हिचकोलेदार और दुर्गम रास्तों से राहत मिलेगी, बल्कि राज्य में पर्यटन गतिविधियों, स्थानीय व्यापार और पर्वतीय अर्थव्यवस्था को भी एक नई दिशा मिलेगी।

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