August 6, 2026

उत्तराखंड के चकराता के लकी रावत बने वैश्विक गौरव, रूस के प्रतिष्ठित ‘आइस ब्रेकर ऑफ नॉलेज’ अभियान के लिए भारत से एकमात्र छात्र चयनित,,,

उत्तराखंड के चकराता के लकी रावत बने वैश्विक गौरव, रूस के प्रतिष्ठित ‘आइस ब्रेकर ऑफ नॉलेज’ अभियान के लिए भारत से एकमात्र छात्र चयनित,,,

चकराता। उत्तराखंड के चकराता निवासी और सेपियंस स्कूल के 10वीं कक्षा के छात्र लकी रावत ने अपनी प्रतिभा के बल पर देश और राज्य का नाम रोशन किया है। उनका चयन अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक एवं शैक्षिक अभियान आइस ब्रेकर ऑफ नॉलेज’ (Ice Breaker of Knowledge) के लिए हुआ है। इस अत्यंत प्रतिष्ठित अभियान में वह भारत के एकमात्र छात्र प्रतिनिधि के रूप में हिस्सा ले रहे हैं।

🟢 रूस से शुरू हुआ 10 दिवसीय ऐतिहासिक अभियान

​रूस के मुरमान्स्क से शुरू हुए इस 10 दिवसीय अभियान में दुनिया भर के 22 देशों के 14 से 16 वर्ष आयु वर्ग के चुनिंदा छात्र हिस्सा ले रहे हैं।

  • अनोखी यात्रा: इस अभियान के तहत प्रतिभागी ‘न्यूक्लियर आइसब्रेकर जहाज 50 लेट पोबेडी’ पर सवार होकर सीधे 90 डिग्री उत्तरी अक्षांश (North Pole) तक की ऐतिहासिक यात्रा करेंगे।
  • दुर्लभ उपलब्धि: उत्तरी ध्रुव पर पहुंचने वाले दुनिया के चुनिंदा और विशेष लोगों में अब लकी रावत भी शामिल हो गए हैं।

🔴 कठिन चयन प्रक्रिया और कड़ा मुकाबला

​लकी रावत ने साझा किया कि इस वैश्विक मंच तक पहुंचने के लिए उन्हें तीन चरणों वाली बेहद कठिन चयन प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।

    • एकल प्रतिनिधित्व: इस अभियान की प्रतिस्पर्धा के तहत प्रत्येक देश से केवल एक ही छात्र का चयन किया जाना था।
    • गर्व का क्षण: भारत का प्रतिनिधित्व करने को लेकर लकी ने कहा कि यह उनके लिए अत्यंत गर्व का विषय है और यह अनुभव उन्हें विज्ञान, अनुसंधान तथा वैश्विक सहयोग के क्षेत्र में आगे बढ़ने की एक नई प्रेरणा देगा।

🟢अभियान का मुख्य उद्देश्य

इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य छात्रों को आर्कटिक, जलवायु परिवर्तन, ध्रुवीय पारिस्थितिकी, समुद्री विज्ञान और वैज्ञानिक अनुसंधान से व्यावहारिक रूप से जोड़ना है। इसके साथ ही यह दुनिया भर के युवा वैज्ञानिकों के बीच ज्ञान और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देता है।

 

🟢 खेल और शिक्षा दोनों में उत्कृष्ट प्रदर्शन

​लकी रावत न केवल अकादमिक रूप से मेधावी हैं, बल्कि सह-शैक्षणिक गतिविधियों में भी आगे हैं। पढ़ाई के साथ-साथ वह जूडो के एक बेहतरीन खिलाड़ी भी हैं।

​उनके पिता राम सिंह ने बेटे की इस शानदार उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा कि कठिन ऑनलाइन परीक्षाओं और चरणों को पार कर भारत का प्रतिनिधित्व करना उनके पूरे परिवार और क्षेत्र के लिए अत्यंत सम्मान की बात है। लकी की इस सफलता ने उत्तराखंड के युवाओं के लिए विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में नए द्वार खोल दिए हैं।

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