October 30, 2026

उत्तराखंड “बादलों के फेर में तकनीक बनी सहारा” ‘द स्काईव्यू नाइट’ ऐप से चांद की सटीक स्थिति जान सुहागिनों ने दिया अर्घ्य, संपन्न हुआ करवा चौथ का पावन पर्व,,,

उत्तराखंड “बादलों के फेर में तकनीक बनी सहारा” ‘द स्काईव्यू नाइट’ ऐप से चांद की सटीक स्थिति जान सुहागिनों ने दिया अर्घ्य, संपन्न हुआ करवा चौथ का पावन पर्व,,,

​देहरादून। अखंड सुहाग, अटूट आस्था और समर्पण का पावन पर्व करवा चौथ श्रद्धा व उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस वर्ष कई इलाकों में मौसम के बदले मिजाज और आसमान में बादलों के घने डेरे के कारण सुहागिनों को चंद्र दर्शन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। ऐसे में आस्था और आधुनिक तकनीक का एक अनोखा संगम देखने को मिला। चंद्रमा के सीधे दृष्टिगोचर न होने पर कई व्रती महिलाओं ने ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और स्टार-गेजिंग ऐप ‘द स्काईव्यू नाइट’ (SkyView Lite / Star Walk) का सहारा लेकर चंद्रमा की सटीक दिशा व स्थिति का पता लगाया और विधि-विधान पूर्वक पूजा संपन्न कर अर्घ्य दिया।

​बादलों ने बढ़ाई प्रतीक्षा, तकनीक ने आसान की राह

​सूर्यास्त के बाद से ही सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार कर पूजा की थाली और छलनी लिए छतों व आंगनों में चांद के दीदार की प्रतीक्षा कर रही थीं। कई शहरों में आसमान में घनी धुंध और बादलों के कारण जब निर्धारित समय पर चंद्रमा नजर नहीं आया, तो परिजनों और महिलाओं ने मोबाइल तकनीक की मदद ली।

​’द स्काईव्यू नाइट’ जैसे खगोलीय (Astronomy) ऐप्स ने मोबाइल कैमरे और सेंसर के जरिए आसमान की ओर रुख करते ही बादलों के पीछे छिपे चंद्रमा की 360-डिग्री सटीक दिशा, कोण और ऊंचाई दर्शाई। स्क्रीन पर चांद की सटीक अवस्थिति देखकर महिलाओं ने उसी दिशा में मुख कर पारंपरिक विधि से अर्घ्य अर्पित किया और अपने अखंड सौभाग्य की मंगलकामना की।

​धार्मिक दृष्टि और ज्योतिषीय मत

​धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि प्रतिकूल मौसम अथवा बादलों के कारण प्रत्यक्ष चंद्र दर्शन संभव न हो, तो पंचांग द्वारा निर्धारित चंद्रोदय के समय पर उस दिशा विशेष की ओर मुख करके पूजा-अर्चना की जा सकती है।

​ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि करवा चौथ का मूल भाव श्रद्धा, संकल्प और निष्ठा से जुड़ा है। तकनीक के माध्यम से आकाशीय पिंडों की वास्तविक स्थिति जानकर पूजन करना शास्त्रसम्मत नियमों के विरुद्ध नहीं है, बल्कि यह संकटकालीन परिस्थिति में संकल्प पूर्ण करने का एक वैज्ञानिक व व्यावहारिक मार्ग है।

​छलनी से देखा प्रतिबिंब, पति के हाथों जल पीकर खोला व्रत

​दिशा और स्थिति सुनिश्चित होने के बाद महिलाओं ने रोली, अक्षत, धूप, दीप व नैवेद्य अर्पित कर भगवान चंद्रदेव को अर्घ्य दिया। इसके उपरांत पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए छलनी की ओट से चंद्र ज्योति और फिर अपने पति का मुख देखकर आशीर्वाद लिया। पतियों द्वारा जल ग्रहण कराए जाने के साथ ही महिलाओं ने निर्जला उपवास पूरा किया और बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर पारिवारिक सुख-समृद्धि की कामना की।

​आस्था के इस महापर्व पर परंपरा और आधुनिक विज्ञान के इस तालमेल की हर ओर प्रशंसा हो रही है। महिलाओं का कहना था कि तकनीक ने न केवल उनकी पूजा को समय पर पूर्ण कराया, बल्कि मन में किसी भी प्रकार के संशय को भी दूर कर दिया।

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