May 3, 2026

उत्तराखंड भ्रष्टाचार पर सीबीआई का प्रहार, रिश्वतखोर वरिष्ठ सांख्यिकी अधिकारी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल,,,

उत्तराखंड भ्रष्टाचार पर सीबीआई का प्रहार, रिश्वतखोर वरिष्ठ सांख्यिकी अधिकारी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल,,,

देहरादून। उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के विरुद्ध केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक और निर्णायक कदम उठाया है। सीबीआई के एंटी करप्शन ब्यूरो ने रुड़की के एक टैक्स अधिवक्ता से रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किए गए वरिष्ठ सांख्यिकी अधिकारी संजय कुमार के खिलाफ विशेष अदालत में चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल कर दी है।

रिश्वतकांड का पूरा घटनाक्रम

​यह मामला रुड़की निवासी टैक्स अधिवक्ता प्रभात कुमार अग्रवाल की शिकायत के बाद प्रकाश में आया था। घटना का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है:

  • मामला: हरिद्वार स्थित ‘बीएस इंडस्ट्री’ (प्लाईवुड यूनिट) के वार्षिक रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया।
  • रिश्वत की मांग: देहरादून में तैनात वरिष्ठ सांख्यिकी अधिकारी संजय कुमार द्वारा रिटर्न के बदले ₹5,000 की अवैध मांग की गई।
  • डिजिटल से नकद तक का दबाव: आरोपी ने पहले 24 फरवरी को फोन कर डिजिटल पेमेंट का दबाव बनाया। भुगतान न होने पर 25 फरवरी को पुनः संपर्क किया, जिसके बाद अधिवक्ता ने सीबीआई को सूचित करते हुए नकद भुगतान का जाल बिछाया।

सीबीआई की कार्रवाई और चार्जशीट की मुख्य बातें

​सीबीआई ने आरोपी अधिकारी को उसके आवास से रिश्वत की राशि स्वीकार करते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के ठीक दो महीने के भीतर, 25 अप्रैल 2026 को न्यायालय में दाखिल चार्जशीट में कई गंभीर खुलासे किए गए हैं:

  1. संपत्ति का विवरण: चार्जशीट में आरोपी अधिकारी की ज्ञात आय से संबंधित चल और अचल संपत्तियों का विस्तृत ब्यौरा संलग्न किया गया है।
  2. साक्ष्य संकलन: फोन कॉल रिकॉर्डिंग और रंगे हाथ गिरफ्तारी के दौरान जुटाए गए फॉरेंसिक साक्ष्यों को आधार बनाया गया है।
  3. त्वरित कार्रवाई: दो महीने के भीतर आरोप पत्र दाखिल करना सीबीआई की कार्यक्षमता और मामले की गंभीरता को दर्शाता है।

प्रशासनिक संदेश और प्रभाव

​इस कार्रवाई ने राज्य के सरकारी विभागों में हड़कंप मचा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ₹5,000 जैसी छोटी राशि के मामले में भी सीबीआई की यह सक्रियता एक स्पष्ट संदेश है कि भ्रष्टाचार के किसी भी स्तर को बख्शा नहीं जाएगा।

“यह आरोप पत्र न केवल एक अधिकारी की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करता है, बल्कि अन्य लोक सेवकों के लिए एक कड़ी चेतावनी भी है।” यह मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है, जहाँ सीबीआई द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आगामी सुनवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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