August 19, 2026

उत्तराखंड में एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा, औद्योगिक विकास के लिए मिलेंगी चार हजार एकड़ भूमि, 50 हजार करोड़ निवेश और एक लाख रोजगार का रखा लक्ष्य,,,,

उत्तराखंड में एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा, औद्योगिक विकास के लिए मिलेंगी चार हजार एकड़ भूमि, 50 हजार करोड़ निवेश और एक लाख रोजगार का रखा लक्ष्य,,,,

देहरादून: उत्तराखंड में नए उद्योग स्थापित करने वाली सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) इकाइयों के लिए बड़ी खुशखबरी है। राज्य सरकार ने हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और देहरादून जनपदों में करीब चार हजार एकड़ औद्योगिक भूमि उपलब्ध कराने का विस्तृत रोडमैप तैयार किया है। उद्योग विभाग की इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की 96,410 एमएसएमई इकाइयों को उत्पादन और निर्यात से तेजी से जोड़ना है।

​इसके तहत नई इकाइयों को समयबद्ध ढंग से भूमि आवंटन, आधारभूत सुविधाएं, वित्तीय सहायता और आवश्यक अनुमतियां उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार का लक्ष्य निवेश को बढ़ावा देना, स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करना और राज्य के औद्योगिक विकास को गति देना है, जिससे एमएसएमई क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हो सके।

🟢 एक लाख रोजगार और 50 हजार करोड़ निवेश का महालक्ष्य

​राज्य सरकार का मुख्य फोकस एरोमा, इलेक्ट्रॉनिक्स, प्लास्टिक और स्टार्टअप आधारित उद्योगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर है। आगामी दो वर्षों में एक लाख नए रोजगार के सृजन और 50 हजार करोड़ रुपये के निवेश का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। कई परियोजनाओं में भूखंडों का आवंटन तेजी से चल रहा है, जबकि कुछ नई औद्योगिक अवस्थापनाओं का निर्माण कार्य भी तीव्र गति से प्रगति पर है।

​इन प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में मिलेगी भूमि

    • एरोमा पार्क (काशीपुर): 41 एकड़ भूमि पर विकसित इस एरोमा पार्क में अब तक 36 भूखंड आवंटित किए जा चुके हैं। यह पार्क राज्य की विशेष एरोमा पार्क नीति पर आधारित है।
    • इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर: केंद्र सरकार की एमएसएमई योजना के तहत खुरपिया एवं पराग में तीन हजार एकड़ तथा काशीपुर में 133 एकड़ में विकसित क्लस्टर में 34 भूखंड आवंटित हो चुके हैं, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को अभूतपूर्व बढ़ावा मिल रहा है।
    • प्लास्टिक पार्क (सितारगंज): सितारगंज फेज-दो में 40 एकड़ क्षेत्र में विकसित प्लास्टिक पार्क में 46 भूखंड आवंटित हो चुके हैं। यहां सिपेट सेंटर, परीक्षण, प्रशिक्षण, वेयरहाउस और प्लास्टिक वेस्ट रीसाइक्लिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
    • फ्लैटेड फैक्ट्री: हरिद्वार, पंतनगर और सेलाकुई में फ्लैटेड फैक्ट्रियां बनाई जा रही हैं, ताकि कम पूंजी वाले उद्यमी और स्टार्टअप न्यूनतम निवेश में अपने उद्योग स्थापित कर सकें। हरिद्वार में बहुमंजिला भवन पूरी तरह तैयार है, जिसमें 40 से 60 उद्योग स्थापित किए जाएंगे।
    • खानपुर इंडस्ट्रियल एस्टेट: हरिद्वार के खानपुर में 80 एकड़ क्षेत्र में एक नया इंडस्ट्रियल एस्टेट विकसित किया जा रहा है। इसका निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और यहां करीब दो सौ एमएसएमई इकाइयों को भूखंड आवंटित किए जाएंगे।

“उत्तराखंड में औद्योगिक निवेश को गति देने के लिए सिडकुल विभिन्न विशेष औद्योगिक पार्क और आधुनिक औद्योगिक अवसंरचना विकसित कर रहा है। काशीपुर, सितारगंज, हरिद्वार, पंतनगर और सेलाकुई में विकसित की जा रही परियोजनाओं का उद्देश्य नए उद्योगों को आकर्षित करने के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाना है।”- भरत सिंह चौधरी, एमएसएमई मंत्री

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