उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों का बढ़ता खतरा, पिथौरागढ़ और चमोली में 13 संवेदनशील झीलें चिह्नित, मंडरा रहा ‘ग्लोफ’ का संकट,,,

देहरादून। हिमालयी क्षेत्रों में तेजी से पिघलते ग्लेशियरों के कारण बन रही विशाल झीलें उत्तराखंड के लिए एक नए और गंभीर आपदा खतरे का संकेत दे रही हैं। आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग के हालिया अध्ययन के अनुसार, प्रदेश में ऐसी 13 संवेदनशील झीलें चिह्नित की गई हैं। यदि इन झीलों के प्राकृतिक बांध टूटते हैं, तो कुछ ही पलों में लाखों घनमीटर पानी निचली घाटियों की ओर कहर बनकर बरस सकता है।
पिथौरागढ़ और चमोली में सबसे अधिक जोखिम
चि चिह्नित झीलों में से सर्वाधिक छह झीलें पिथौरागढ़ जिले में स्थित हैं, जिनमें से चार को अत्यधिक संवेदनशील ‘ए’ श्रेणी में रखा गया है। पिथौरागढ़ की इन जोखिम भरी झीलों में मबांग लेक, स्यांतयांकी लेक, प्युनग्रू लेक और एक अनाम झील शामिल हैं, जबकि दो अन्य झीलों को ‘बी’ श्रेणी में जगह मिली है। ये अधिकांश झीलें दारमा, लासर यांग्ती और कुथी यांग्ती जैसी उच्च हिमालयी घाटियों में फैली हैं। वहीं, चमोली जिले में भी चार झीलें खतरे के दायरे में हैं, जिनमें सरस्वती लेक, दो अनाम झीलें और केदार ताल शामिल हैं।
’ग्लोफ’ (GLOF) आपदा और सुरक्षा चुनौतियां
मौसम में तेजी से हो रहे बदलाव, भारी बारिश, ग्लेशियरों के तीव्र गति से पिघलने तथा बर्फ या चट्टानों के झील में गिरने से इनके प्राकृतिक बांध लगातार कमजोर हो रहे हैं। इससे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (ग्लोफ) की भयंकर घटना होने की आशंका बढ़ गई है। झील का पानी अचानक नीचे आने से नदी घाटियों में बाढ़ का वेग कई गुना बढ़ सकता है। सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित इन झीलों के निचले हिस्से में रिहायशी बस्तियों के साथ-साथ सड़क, पुल और कई महत्वपूर्ण रणनीतिक संपर्क मार्ग मौजूद हैं, जिससे खतरा और अधिक गंभीर हो जाता है।
वैज्ञानिक सर्वेक्षण और आगे की रणनीति
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अब तक प्रदेश की चार प्रमुख झीलों का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन पूरा किया जा चुका है। इनमें चमोली की वसुधारा ताल तथा पिथौरागढ़ की मबांग, स्यांतयांकी और प्युनग्रू झीलें शामिल हैं। वसुधारा ताल में बाथीमेट्री और ग्लेशियोलाजिकल अध्ययन किया गया है, जिससे इसकी गहराई, जल क्षमता और भौगोलिक स्थिति का सटीक आकलन हुआ है।
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार, मौसम के अनुकूल होने पर अन्य संवेदनशील ग्लेशियर झीलों के अध्ययन के लिए भी वैज्ञानिक दलों को मैदान में भेजा जाएगा।

More Stories
देश – दुनिया, जापान में कुदरत का कहर, 7.1 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप से कांपी धरती, 1 मीटर ऊंची सुनामी लहरों की चेतावनी जारी,,,
देश – दुनिया, जापान में कुदरत का कहर, 7.1 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप से कांपी धरती, विभाग ने 1 मीटर ऊंची सुनामी लहरों की चेतावनी जारी,,,
भारत में सोशल मीडिया और सामाजिक संगठनों में आरक्षण नीति और योग्यता पर बड़ी बहस, शिक्षा/ चिकित्सा से लेकर सियासत तक गरमाया मुद्दा – संडे स्पेशल