August 25, 2026

उत्तराखंड में मानसून का कहर, देहरादून, नैनीताल समेत 5 जिलों में ‘भारी से बहुत भारी’ बारिश का अलर्ट, अगले 24 घंटे बेहद संवेदनशील,,,,

उत्तराखंड में मानसून का कहर, देहरादून, नैनीताल समेत 5 जिलों में ‘भारी से बहुत भारी’ बारिश का अलर्ट, अगले 24 घंटे बेहद संवेदनशील,,,,

देहरादून। उत्तराखंड में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है, जिसके चलते राज्य के अधिकांश हिस्सों में लगातार बारिश का दौर जारी है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने प्रदेश के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश, तेज आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली गिरने की गंभीर चेतावनी (अलर्ट) जारी की है। प्रशासन ने आम जनता से अगले 24 घंटों तक विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।

🔴 अगले 24 घंटे: इन 5 जिलों में सबसे ज्यादा खतरा

​NDMA द्वारा जारी बुलेटिन के अनुसार, आगामी 24 घंटों के भीतर राज्य के निम्नलिखित जिलों के कुछ इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश के साथ तेज गर्जना और बिजली गिरने की आशंका है:

  • देहरादून
  • नैनीताल
  • बागेश्वर
  • पौड़ी
  • टिहरी

🔴 तात्कालिक (Flash) अलर्ट: अगले 3 घंटे भी भारी

​मौसम विभाग और NDMA ने ताजा फ्लैश अलर्ट जारी करते हुए अगले 3 घंटों के भीतर देहरादून, हरिद्वार, अल्मोड़ा, चंपावत, नैनीताल, पिथौरागढ़ और ऊधम सिंह नगर जिलों के कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ तीव्र से बहुत तीव्र बारिश और बिजली गिरने की तात्कालिक आशंका जताई है। इससे पहले सुबह भी इन जिलों के लिए अलर्ट जारी किया गया था, जो लगातार बदलते मौसम की गंभीरता को दर्शाता है।

🛑 आम जनता के लिए जरूरी एडवायजरी

​खराब मौसम को देखते हुए मौसम विभाग और प्रशासन ने नागरिकों व पर्यटकों के लिए सुरक्षा गाइडलाइन जारी की है:

  • अनावश्यक यात्रा से बचें: जब तक बहुत जरूरी न हो, पहाड़ी और मैदानी मार्गों पर सफर करने से परहेज करें। यात्रा से पहले सड़क की स्थिति की जानकारी जरूर लें।
  • नदी-नालों से दूरी: जलस्तर तेजी से बढ़ने की आशंका के चलते नदी, नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के पास बिल्कुल न जाएं।
  • बिजली चमकने पर सावधानी: आकाशीय बिजली कड़कने के दौरान खुले मैदानों, ऊंचे पेड़ों या खंभों के नीचे शरण न लें।

🔴 प्रशासन अलर्ट मोड पर

​लगातार जारी चेतावनियों के मद्देनजर जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग को हाई अलर्ट पर रखा गया है। संवेदनशील और संभावित भूस्खलन वाले क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने और तत्काल राहत व बचाव कार्य शुरू करने के लिए रेस्क्यू टीमें (NDRF/SDRF) पूरी तरह तैयार हैं।

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