उत्तराखंड में सख्त हुए निर्माण नियम, यूनिफाइड जोनिंग रेगुलेशन-2025 लागू, अब केवल सड़क की चौड़ाई के आधार पर पास नहीं होगा कॉमर्शियल नक्शा,,,

देहरादून। उत्तराखंड में ‘यूनिफाइड जोनिंग रेगुलेशन-2025’ के लागू होने के बाद राज्य में भवन निर्माण के नियम काफी सख्त हो गए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब केवल सड़क की चौड़ाई के आधार पर आवासीय जमीन पर कॉमर्शियल नक्शे मंजूर नहीं किए जाएंगे। आवास विभाग द्वारा केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप इस नई व्यवस्था की अधिसूचना बुधवार देर शाम जारी कर दी गई है।
अब क्या बदला है? (प्रमुख बदलाव)
- सड़क की चौड़ाई का फॉर्मूला खत्म: अब तक यदि किसी आवासीय भूखंड के सामने 40 फीट या उससे चौड़ी सड़क होती थी, तो वहां होटल, अस्पताल, दुकान या कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स का नक्शा आसानी से पास हो जाता था। नई व्यवस्था में यह शॉर्टकट पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। सड़क चाहे कितनी भी चौड़ी क्यों न हो, अकेले इस आधार पर व्यावसायिक निर्माण की अनुमति नहीं मिलेगी।
- लैंडयूज की अनिवार्यता: किसी भी निर्माण को मंजूरी देने से पहले यह अनिवार्य रूप से जांचा जाएगा कि मास्टर प्लान और जोनल प्लान में उस जमीन का निर्धारित ‘लैंडयूज’ (भूमि उपयोग) क्या है। यदि जमीन कागजों में आवासीय दर्ज है, तो वहां व्यावसायिक निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी।
- व्यावसायिक गतिविधियों के लिए नियम: होटल, अस्पताल और कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स जैसी तमाम व्यावसायिक गतिविधियों के लिए अब जमीन का कॉमर्शियल लैंडयूज में होना अनिवार्य कर दिया गया है। इसका सबसे बड़ा असर उन क्षेत्रों पर पड़ेगा जहां आवासीय कॉलोनियों के बीच धड़ल्ले से व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं।
जोन के दायरे में 152 गतिविधियां

नए रेगुलेशन के तहत मास्टर प्लान के अनुसार कुल 152 गतिविधियों को अधिसूचित किया गया है, जिनके लिए जोन के हिसाब से अनुमति और प्रतिबंध तय कर दिए गए हैं। इस सूची में आवासीय योजनाओं के साथ-साथ कृषि, पार्क, पशुपालन, आंगनबाड़ी, आश्रम, सभागार, बैंक्वेट हॉल, बोर्डिंग हाउस, बस स्टैंड और कॉलेज जैसी विभिन्न गतिविधियां शामिल हैं।
सख्त हुई मंजूरी की प्रक्रिया
निर्माण स्वीकृतियों की पूरी प्रक्रिया को भी कड़ा कर दिया गया है। जिन मामलों में विशेष अनुमति की आवश्यकता होगी, उन पर अब अंतिम निर्णय शासन स्तर पर ही लिया जाएगा। विकास प्राधिकरणों के स्तर पर दी जाने वाली मंजूरियों के दायरे को सीमित कर दिया गया है तथा शासन स्तर पर भी नगर नियोजन विभाग की संस्तुति के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।
नया रेगुलेशन लाने का उद्देश्य
आवास विभाग का मुख्य उद्देश्य शहरों में निर्माण कार्यों को मास्टर प्लान के मुताबिक व्यवस्थित करना और अवैध निर्माण पर प्रभावी रोक लगाना है। आवास सचिव आर. राजेश कुमार के अनुसार, इस रेगुलेशन के जरिए शहरों में निर्माण को अनुशासित करने की व्यवस्था को अब पूरी सख्ती के साथ लागू किया जाएगा। इस बदलाव से मुख्य सड़कों के किनारे तेजी से हो रहे आवासीय क्षेत्रों के व्यावसायीकरण पर लगाम लगेगी।

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