देश – दनिया, अमेरिकी इतिहास में अभूतपूर्व फैसला, फोर्ट हुड हमले के दोषी पूर्व मेजर निदाल हसन को फायरिंग स्क्वाड देगा सज़ा-ए-मौत, टीवी पर होगा सीधा प्रसारण,,,

नई दिल्ली। अमेरिका में फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर हुए घातक गोलीबारी कांड के मुख्य दोषी एवं पूर्व सैन्य अधिकारी मेजर निदाल हसन को सार्वजनिक तौर पर मृत्युदंड देने की तैयारी की जा रही है। अमेरिकी इतिहास में यह पहला अवसर होगा जब किसी मुजरिम की सज़ा-ए-मौत की प्रक्रिया का टेलीविजन पर लाइव प्रसारण किया जाएगा। निदाल हसन को उसी स्थान पर गोली मारकर मौत के घाट उतारा जाएगा, जहां उसने 13 अमेरिकी सैनिकों की निर्मम हत्या की थी।
पेंटागन का रुख- ‘कड़े परिणामों से सबक लें लोग’
पेंटागन ने इस निर्णय की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया है कि सज़ा का सीधा प्रसारण इसलिए किया जा रहा है ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए और लोग सबक ले सकें। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि नागरिकों को यह भली-भांति समझना होगा कि देश और मानवता के खिलाफ किए गए ऐसे जघन्य कृत्यों के परिणाम कितने गंभीर और भयावह होते हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने जताई आपत्ति
दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र (UN) ने इस लाइव-स्ट्रीमिंग के फैसले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। यूएन का कहना है कि किसी भी कैदी को दी जाने वाली मौत की सज़ा का सार्वजनिक या लाइव प्रसारण करना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार नियमों के तहत ‘यातना पर पूर्ण प्रतिबंध’ के सिद्धांत का खुला उल्लंघन है।
क्या था फोर्ट हुड नरसंहार?

निदाल हसन ने 5 नवंबर 2009 को एक निजी पिस्तौल लेकर फोर्ट हुड सैन्य अड्डे में प्रवेश किया था और वहां मौजूद निहत्थे सैनिकों पर अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दी थीं। अमेरिकी इतिहास के सबसे भीषण गोलीबारी कांडों में शामिल इस घटना में 13 सैनिकों की मौत हुई थी। जांच के दौरान हसन ने स्वीकार किया था कि उसने यह हमला अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान और इराक के खिलाफ छेड़े गए युद्ध के विरोध में अंजाम दिया था। वर्ष 2013 में अदालत ने उसे पूर्व-नियोजित हत्या और हत्या के प्रयास के कुल 45 मामलों में दोषी ठहराया था।
3 दिसंबर को अमल में आ सकती है सज़ा
हसन के पास वर्तमान में अपनी सज़ा के विरुद्ध अंतिम अपील दायर करने का अधिकार शेष है। यदि उसकी अपील पर अदालत द्वारा रोक नहीं लगाई जाती है, तो 3 दिसंबर को फायरिंग स्क्वाड उसे सार्वजनिक रूप से गोली मारकर मृत्युदंड देगा।
ऐतिहासिक संदर्भ
- 1936: अमेरिका के केंटकी में किसी अश्वेत युवक को अंतिम बार सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई थी। लगभग एक सदी बाद देश में सार्वजनिक मृत्युदंड का यह पहला मामला होगा।
- 1961: इसके बाद अमेरिकी सैन्य न्याय प्रणाली में पहली बार फायरिंग स्क्वाड के माध्यम से सज़ा-ए-मौत दी जा रही है।
अन्य देशों में भी हो चुका है लाइव सज़ा का प्रसारण
- चीन (मार्च 2013): चार विदेशी ड्रग तस्करों को मृत्युदंड दिए जाने से ठीक पहले के पलों का सरकारी टीवी पर सीधा प्रसारण किया गया था।
- ईरान (सितंबर 2017): इस्माइल जाफरजादेह को फांसी दिए जाने का वीडियो सरकारी ब्रॉडकास्टर की वेबसाइट पर साझा किया गया था।
- अफगानिस्तान (22 फरवरी 2024): तालिबान शासन ने गजनी में दो दोषियों को सार्वजनिक रूप से गोली मारकर मौत की सज़ा दी।

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