विदेशी संसद में पहली बार गूंजा मां गंगा का जयघोष, फ्रैंकफर्ट की संसद में गंगा पुत्र तन्मय वशिष्ठ का हुआ ऐतिहासिक संबोधन,,,,

हरिद्वार: भारत की पावन जीवनरेखा मां गंगा की महिमा का गुणगान पहली बार विदेश की किसी संसद में सुनाई दिया। जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर की संसद में गंगा सभा हरिद्वार के यशस्वी महामंत्री एवं प्रसिद्ध “गंगा पुत्र” तन्मय वशिष्ठ ने मुख्य अतिथि के रूप में मां गंगा के महत्व पर भावपूर्ण और प्रेरक व्याख्यान दिया।

अपने संबोधन में तन्मय वशिष्ठ ने मां गंगा को केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और सभ्यता की आत्मा बताया। उन्होंने कहा कि मां गंगा हिंदू-मुस्लिम सभी के खेतों को समान रूप से सींचती हैं और बिना भेदभाव पूरे समाज का पोषण करती हैं। मोक्षदायिनी मां गंगा भारत की आध्यात्मिक चेतना और जीवन दर्शन की प्रतीक हैं, जो मानवता को एक सूत्र में बांधने का कार्य करती हैं।
उनके ओजस्वी वक्तव्य से फ्रैंकफर्ट की संसद के सभी संसदीय सदस्य भावविभोर हो उठे। व्याख्यान के समापन पर संसद भवन में मां गंगा का संयुक्त जयघोष गूंज उठा, जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
यह ऐतिहासिक अवसर न केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर स्थापित करने वाला रहा, बल्कि मां गंगा के संरक्षण और उनकी सार्वभौमिक महत्ता का संदेश भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने में मिल मील का पत्थर साबित होगा।

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