October 1, 2026

पितृ पक्ष,धरती पर पधारते हैं पूर्वज, तर्पण से प्रसन्न होकर देते हैं सुख-समृद्धि का वरदान,,,,,,,

पितृ पक्ष,धरती पर पधारते हैं पूर्वज, तर्पण से प्रसन्न होकर देते हैं सुख-समृद्धि का वरदान,,,,,,,

पितृ पक्ष (श्राद्ध महालय) सनातन धर्म में पूर्वजों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और श्रद्धा व्यक्त करने का एक अत्यंत पवित्र समय माना जाता है। भाद्रपद मास की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या) तक चलने वाले इस 16 दिनों के पखवाड़े को पितृ पक्ष कहा जाता है।

पूर्वजों के आगमन और आशीर्वाद की मान्यता

धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, पितृ पक्ष के पवित्र दिनों में हमारे पूर्वजों (पितरों) की आत्माएं धरती पर आती हैं। इस अवधि के दौरान पितरों को प्रसन्न करने के लिए किए गए धार्मिक कार्य अत्यंत फलदायी माने जाते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से तर्पण और श्राद्ध करने पर पूर्वज प्रसन्न होते हैं और परिवार को सुख, शांति तथा समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

​पितृ पक्ष के दौरान रखें इन बातों का ध्यान

शास्त्रों के अनुसार, पितृ पक्ष का समय पूरी तरह से पूर्वजों के स्मरण और उनकी आत्मा की शांति के लिए समर्पित होता है। इस समय दौरान किसी भी प्रकार के नए काम की शुरुआत करने से बचना चाहिए। इसके अलावा, इस अवधि में किसी भी तरह की नई खरीदारी करने से परहेज करने की सलाह दी जाती है।

​पितृ शांति और तर्पण का महत्व

पितृ पक्ष का मुख्य उद्देश्य पितरों की आत्मा की शांति और उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करना है। शास्त्रों में उल्लिखित नियमों के तहत दान-पुण्य और तर्पण करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और घर-परिवार में खुशहाली बनी रहती है।

Share