उत्तराखंड पुलिस ने 26 साल बाद बदला अपना ध्येय वाक्य, ‘मित्रता सेवा सुरक्षा’ की जगह अब ‘कर्म सत्यं शौर्यम्’ बना नया आदर्श,,,,,

देहरादून, उत्तराखंड पुलिस ने 26 साल बाद अपने पुराने ध्येय वाक्य ‘मित्रता सेवा सुरक्षा’ को हटाकर संस्कृत के तीन शब्दों ‘कर्म सत्यं शौर्यम्’ को अपना नया ध्येय वाक्य बनाया है।
उत्तराखंड पुलिस की पहचान और कार्यशैली में एक बड़ा बदलाव किया गया है। पिछले 26 वर्षों से चले आ रहे पुराने ध्येय वाक्य ‘मित्रता सेवा सुरक्षा’ को हटाकर अब संस्कृत के तीन शब्दों—‘कर्म सत्यं शौर्यम्’ को उत्तराखंड पुलिस का नया आधिकारिक ध्येय वाक्य बना दिया गया है। इस बदलाव के साथ ही पुलिस महकमे के प्रतीक चिह्न (मोनोग्राम) में भी संशोधन किया गया है।
मोनोग्राम (प्रतीक चिह्न) में भी संशोधन
नए ध्येय वाक्य के शामिल होने के बाद पुलिस के प्रतीक चिह्न को नया रूप दिया गया है। नए मोनोग्राम में शौर्य के प्रतीक ‘लॉरेल रीथ’ (Laurel Wreath) के ठीक बीच में हिमालय पर्वत और इस नए ध्येय वाक्य को स्थान दिया गया है। यह बदलाव राज्य की भौगोलिक स्थिति और पुलिस बल के कर्तव्यों व पराक्रम को दर्शाता है।
‘मित्र पुलिस’ से लेकर जनता के बीच व्यवहार तक का सफर
पूर्व पहचान ,इससे पहले उत्तराखंड पुलिस ने ‘मित्र पुलिस’ के रूप में अपनी पहचान बनाने और खुद को जन-सुरक्षा के पर्याय के रूप में स्थापित करने की पुरजोर कोशिश की थी।
व्यावहारिक सराहना,पुलिस कई मायनों में अपने इस उद्देश्य में सफल भी रही, लेकिन जनता के बीच इसे सबसे बड़ी पहचान और लोकप्रियता इसके मित्रवत व्यवहार और ज़मीनी स्तर के अच्छे कार्यों के कारण मिली थी।
अब इस नए ध्येय वाक्य के साथ पुलिस महकमा अपनी कर्तव्यनिष्ठा और शौर्य को और अधिक मजबूती के साथ जनता के सामने प्रस्तुत करने जा रहा है।

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