September 15, 2026

​”””15 साल बाद अवैध कब्जे से मुक्त हुई आरक्षित वन भूमि, वन विभाग का बड़ा एक्शन””

“”””​15 साल बाद अवैध कब्जे से मुक्त हुई आरक्षित वन भूमि, वन विभाग का बड़ा एक्शन”””

देहरादून (उत्तराखंड)
**उत्तराखंड में अवैध कब्जों के खिलाफ चल रहे अभियान में वन विभाग को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। देहरादून वन प्रभाग के झाझरा रेंज अंतर्गत कंडोली-1 क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से आरक्षित वन भूमि पर किया गया अवैध कब्जा आखिरकार ध्वस्त कर दिया गया है। कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद वन विभाग ने पुलिस और राजस्व टीम की मौजूदगी में 1015 वर्ग मीटर बहुमूल्य वन भूमि को अपने नियंत्रण में ले लिया है।**

🔵पहला आदेश (2009): वन विभाग ने 7 अगस्त 2009 को पहली बार निर्माण हटाने का आदेश दिया, जिसके खिलाफ अतिक्रमणकारी ने अपील की, जो खारिज हो गई। 

🔵हाईकोर्ट का रुख (2017 & 2025): मामला नैनीताल हाईकोर्ट पहुंचा। साल 2017 में याचिका खारिज होने के बाद विशेष अपील की गई। आखिरकार, जून 2025 में हाईकोर्ट ने अंतिम रूप से अपील को खारिज कर दिया और जमीन को सरकारी घोषित किया।

न्यायालय से अंतिम आदेश मिलने के बाद वन विभाग ने सख्त रुख अपनाया। झाझरा रेंज में भारी पुलिस बल और राजस्व विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में अतिक्रमण पर बुलडोजर चलाकर पक्के निर्माण को ढहा दिया गया। इसके तुरंत बाद विभाग ने इस पूरी 1015 वर्ग मीटर जमीन पर बाड़बंदी (तारबाड़) कर इसे दोबारा आधिकारिक रूप से अपने रिकॉर्ड में शामिल कर लिया। 
 
वन विभाग के उच्च अधिकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि प्रदेश की आरक्षित वन भूमि पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा या अनधिकृत निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद प्रदेश भर के संवेदनशील वन क्षेत्रों (जैसे कॉर्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व के आस-पास) में भी ऐसे सभी पुराने मामलों की फाइलें दोबारा खोली जा रही हैं।
वन विभाग अब इस मुक्त कराई गई भूमि पर सघन वनीकरण (Afforestation) करने की योजना बना रहा है ताकि जंगल के इस हिस्से को उसका प्राकृतिक स्वरूप वापस दिया जा सके।
“डीएफओ वैभव कुमार सिंह ने कहा कि आरक्षित वनभूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या अवैध निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा। वनभूमि की सुरक्षा, संरक्षण और वन सीमा की रक्षा के लिए विभाग आगे भी नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई जारी रखेगा।”
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