October 21, 2026

आसन बैराज पर उतरा विदेशी पंछियों का ‘कारवां’, ठंडी हवाओं के साथ दून में गूंजी साइबेरियाई परिंदों की चहचहाट,,,,

आसन बैराज पर उतरा विदेशी पंछियों का ‘कारवां’, ठंडी हवाओं के साथ दून में गूंजी साइबेरियाई परिंदों की चहचहाट,,,,

देहरादून,विकासनगर, देहरादून के विकासनगर क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध आसन बैराज (आसन वेटलैंड) एक बार फिर विदेशी पक्षियोंकी चहचहाहट से गुलजार हो उठा है। सर्द मौसम की शुरुआत के साथ ही हजारों किलोमीटर का सफर तय कर साइबेरिया, यूरोप और मध्य एशिया से दुर्लभ प्रवासी पक्षियों के पहुँचने का सिलसिला शुरू हो गया है, जिससे दून घाटी के इस प्रमुख रामसर स्थल की रौनक बढ़ गई है।

​🔵 सुर्खाब और राजहंस समेत कई दुर्लभ प्रजातियों का आगमन

​पर्यावरणविदों और पक्षी प्रेमियों के अनुसार, विकासनगर स्थित आसन झील की आबोहवा विदेशी पक्षियों को बेहद रास आती है। यहाँ पहुँचने वाले प्रमुख प्रवासी मेहमानों में रूडी शेलडक (सुर्खाब), बार-हेडेड गूज (राजहंस), गैडवाल, नॉर्दन पिनटेल, कॉमन टील और रेड-क्रेस्टेड पोचार्ड जैसी सुंदर प्रजातियाँ शामिल हैं। ठंड बढ़ने के साथ ही इन पक्षियों के झुंडों की संख्या में और अधिक इज़ाफा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

​🔵 पर्यटन और फोटोग्राफी को मिल रहा बढ़ावा

​आसन बैराज की शांत झील और यहाँ की प्राकृतिक छटा हर साल पर्यटकों और वन्यजीव फोटोग्राफर्स को अपनी ओर आकर्षित करती है। पक्षियों के कलरव और उनकी मनमोहक गतिविधियों को अपने कैमरे में कैद करने के लिए देहरादून, मसूरी और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में प्रकृति प्रेमी विकासनगर पहुँच रहे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर पर्यटन गतिविधियों को भी गति मिल रही है।

🔵 ​पर्यावरण संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण

​वन विभाग और स्थानीय प्रशासन द्वारा इस क्षेत्र को सख्त संरक्षित जोन के रूप में विकसित किए जाने के कारण प्रवासी पक्षियों को पूरी तरह सुरक्षित और अनुकूल वातावरण मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आसन बैराज की यह जैव-विविधता न केवल उत्तराखंड बल्कि देश भर के पर्यावरण संरक्षण मानचित्र पर दून घाटी का मान बढ़ा रही है।

You may have missed

Share