October 25, 2026

“धर्म – कर्म” शरद पूर्णिमा आज चंद्रमा बरसायेगा अमृत, छत पर बिताएं कुछ पल, कल से शुरू होगा पवित्र कार्तिक स्नान,,,

“धर्म – कर्म” शरद पूर्णिमा आज चंद्रमा बरसायेगा अमृत, छत पर बिताएं कुछ पल, कल से शुरू होगा पवित्र कार्तिक स्नान,,,

​हरिद्वार। धर्म शास्त्रों के अनुसार, वर्ष भर में केवल एक ही रात ऐसी होती है जब आकाश से अमृत की वर्षा होती है और वह पावन अवसर है शरद पूर्णिमा। मान्यता है कि रविवार की रात्रि पूर्णचंद्र की रश्मियों (किरणों) के माध्यम से धरती पर अमृत रूपी ‘सोम’ की वर्षा होगी। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि ब्रह्मलोक में अनादि राधा और अनादि कृष्ण के महारास से उत्पन्न हुआ यह सोम लताओं और वनस्पतियों में समा जाता है। शरद पूर्णिमा की रात्रि में जब यह अमृत धरती पर बरसता है, तो इसके प्रभाव से मानव शरीर की अनेक आधियां और व्याधियां नष्ट हो जाती हैं।

​🏵 छत पर खीर रखने की अनूठी परंपरा

इस पावन रात्रि को लेकर स्वास्थ्य और धार्मिक दृष्टि से कई नियम व परंपराएं प्रचलित हैं। इस रात दूध, पोहा या चावल से बनी खीर को मिट्टी अथवा किसी खुले पात्र में रखकर छत पर या खुले आकाश के नीचे चांदनी में रखा जाता है। रातभर चंद्रमा की अमृतमयी किरणें इस खीर पर पड़ती हैं। इसके बाद सुबह अथवा रात्रि में कुछ घंटों के उपरांत इस खीर को परिवार सहित आरोग्य प्राप्ति की भावना के साथ प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता है। मान्यता है कि इस रात खुले आसमान के नीचे कुछ समय बिताने मात्र से ही असाध्य रोगों में राहत मिलती है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

​🏵 माता लक्ष्मी व भगवान विष्णु का पूजन और धन्वंतरि प्राकट्य

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, शरद पूर्णिमा का दिन केवल खगोलीय घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धन और आरोग्य का भी संगम है। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु और धन की देवी माता महालक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना का विधान है। श्रद्धालु सुबह से ही पवित्र गंगा व अन्य पावन नदियों में स्नान कर तटों और देवालयों में पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान शरद पूर्णिमा के दिन ही अमृत कलश हाथ में लिए भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे। इसके अलावा माता महालक्ष्मी का प्राकट्य भी इसी रात हुआ था, इसलिए इस रात्रि को ‘कोजागरी पूर्णिमा’ भी कहा जाता है और चंद्र प्रकाश में बैठकर पूजा की जाती है।

​🏵 नेत्र ज्योति बढ़ाने के लिए त्राटक और धागा पिरोने की विधि

स्वास्थ्य लाभ की दृष्टि से यह भी माना जाता है कि शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी में सुई में धागा पिरोने से या सीधे चंद्रमा की ओर एकटक (त्राटक) देखने से आंखों की कमजोरी दूर होती है और नेत्र ज्योति में वृद्धि होती है। इस पर्व के समापन के साथ ही सोमवार से एक माह तक चलने वाले पवित्र कार्तिक स्नान का भी विधिवत शुभारंभ हो जाएगा।

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