उत्तराखंड आगामी कुंभ मेलों के लिए रेलवे का मेगा प्लान, 200 स्पेशल ट्रेनें रहेंगी तैयार, 150 रैकों का होगा आधुनिक अपग्रेडेशन,,,

हरिद्वार आगामी दो वर्षों में देश के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित होने वाले कुंभ मेलों को लेकर भारतीय रेल ने अभी से व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। लाखों श्रद्धालुओं के सुरक्षित, सुगम और समयबद्ध आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए रेलवे 200 स्पेशल ट्रेनों का बेड़ा पूरी तरह तैयार रखेगा। इसके तहत 200 आईसीएफ (ICF) रैकों के अपग्रेडेशन का बजट स्वीकृत कर दिया गया है।
“रेलवे बोर्ड ने जारी किए सख्त निर्देश; खटारा डिब्बों पर पूर्ण रोक, सुरक्षा और यात्री सुविधाओं के लिए समय पूर्व होगा मेंटेनेंस”
तैयारियों के प्रथम चरण में 150 मेला स्पेशल रैकों के आधुनिकीकरण और रोलिंग स्टॉक प्रोग्राम की जिम्मेदारी 17 अलग-अलग रेल जोनों में बांट दी गई है। जोनवार उपलब्ध इन ट्रेनों को श्रद्धालुओं के दबाव के अनुसार तुरंत ट्रैक पर उतारा जाएगा। इन स्पेशल ट्रेनों को एक विशिष्ट पहचान देने के लिए इनके बाहरी हिस्से पर रेलवे बोर्ड द्वारा स्वीकृत विशेष विनाइल रैपिंग डिजाइन की जाएगी।
खटारा डिब्बों पर रोक, शत-प्रतिशत फिटनेस अनिवार्य
रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि कुंभ मेला स्पेशल के तौर पर किसी भी पुराने या खटारा डिब्बे का संचालन नहीं किया जाएगा। सभी जोनों को निर्धारित समय से पहले कोच, पहिए, इंजन और स्पेयर पार्ट्स की आईओएच (IOH) और पीओएच (POH) जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। डिपो में अतिरिक्त पहियों और आवश्यक स्पेयर पार्ट्स का बफर स्टॉक रखने को कहा गया है।

मार्ग में या मेला क्षेत्र में किसी भी आपात तकनीकी खराबी या कोच काटने की नौबत से बचने के लिए अंडरगियर मेंटेनेंस को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अतिरिक्त साइड बफर, कपलिंग, बोगी और एयरब्रेक सिस्टम की 100% जांच अनिवार्य की गई है। कोच के भीतर यात्रियों की सुविधा के लिए सीट, पंखे, लाइट, चार्जिंग सॉकेट, खिड़की और दरवाजों की पुख्ता व्यवस्था रहेगी।
किस जोन को मिले कितने रैक?
रोलिंग स्टॉक प्रोग्राम अपग्रेडेशन के तहत कुल 150 रैकों को 17 जोनों में विभाजित किया गया है। इसमें प्रमुख रूप से:
- पूर्व मध्य रेल (ECR): 12 रैक
- पूर्व रेलवे (ER): 12 रैक
- दक्षिण पूर्व रेलवे (SER): 10 रैक
- शेष रैकों की जिम्मेदारी अन्य संबंधित जोनों को सौंपी गई है।
पूर्व अनुभवों से सबक, महीनों पहले शुरू हुई कसरत
रेलवे के इस अग्रिम प्रबंधन के पीछे पिछले कुंभ मेलों का अनुभव है। उदाहरण के तौर पर, प्रयागराज महाकुंभ के दौरान अकेले धनबाद रेल मंडल से 76 स्पेशल ट्रेनें चलाई गई थीं (जिनमें 28 ट्रेनें सीधे धनबाद स्टेशन से संचालित थीं)। भारी भीड़ के कारण नियमित ट्रेनों के वातानुकूलित (AC) कोचों को भी जनरल बनाकर चलाना पड़ा था। इसी अप्रत्याशित भीड़ और संचालन संबंधी चुनौतियों को देखते हुए रेलवे ने इस बार कई माह पहले से ही ठोस रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।

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